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पृष्ठ:साहित्यालोचन.pdf/३४२

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३२१ शैली के विमान में बाक्य का स्थान पड़े महत्व का है। रसमा-शैली में रहीं पर निर्भर रहकर पूरा पूरा कौशल दिखाया जा सकता है और इसी में इनकी विशेषता अनुभूत हो सकती है। इस संबंध में सबसे पहली पात, जिस पर हमें विचार करना चाहिए, शब्दों का उपयुक्त प्रयोग है। जिस भाष या विधार को हम प्रकट करना चाहते हैं, मेक यसौ को मस्यक करनेवाले शवों का हमें उपयोग करना चाहिए। बिना सोचे समझे शब्दों का अनुपयुक प्रयोग धारयों की सुंदरता गट करता और सेवा के शब्द-भांडार की अपूलामा अचमा उसकी असावधानी प्रकट करता है। असपर पाक्यों में प्रयोग करने के लिये शब्दों का चुनाव बड़े ध्यान और विवेचन से करना चाहिए। इसके अनंतर हमें इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि पाक्यों की रचना किस प्रकार से हो । वैयाकरणों ने वापयों के अनेक प्रकार बताए हैं और उनको रीसियों तथा वाक्यों की शुद्धि आदि पर भी विचार किया है। पर हमें विशेषता धेयाकरण की दृष्टि से वापयों पर विचार माहौ करना है। हमें तो यह देखना है कि हम किस प्रकार पाक्यों की रचना और प्रयोग करके अधिक से अधिक प्रभाव डापत्र कर सकते हैं। इस प्रयोजन के लिये सबसे अधिक मच्छ वाक्य थाह होता है जिसे हम वाक्योकाय कह सकते हैं और मिसमै तर सक अयं स्पष्ट नहीं होता, अब तक यह वाक्य २१