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पृष्ठ:साहित्यालोचन.pdf/३४८

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शैली का बिया अर्थ ही लिया जाता है। परंतु वाक्यों में पिरोए जाने पर समका अर्थ अषस्थानुस वाय, वश्य या व्यंग्य हो जाता है। जिन शब्दों का एक ही अर्थ होता है, उनके संबंध में तो केवल लक्षणा और व्यंजना शक्तियों का ही उपयोग वेब पाता है, पर जहाँ एक शब्द का अर्थ होते हैं, यहाँ अमिधा शक्ति द्वारा अभिप्रेत अर्थका ग्रहण किया जाता है। शव को सुनते ही यपि उसके अर्थ का योग हो आष, तो यह उसकी अमिधा शकि का कार्य हुआ। पर शब्द के अनेक अर्थ हो सकते है। इसलिये जिस शक्ति के कारण कोई शम्द किसी एक ही अयं को सूचित करता है, उसे अभिधा शक्ति कहते हैं। इसका निर्णय कि कहाँ किस शब्द का क्या अर्थ है, संयोग, वियोग, साहचर्य, मियेष, अर्थ-प्रकरण, प्रसंग, सिह, सामर्थ्य, औचित्य, देशवल, काह. भेद, और स्वर मेव से किया जाता है। जैसे 'मरु में जीवन दुरि है कहने से मरुभूमि के कारण यहाँ जीपन' का अर्थ केवल 'पानी' ही दिया जा सकता है, दूसरा नहीं। अतएव यहाँ 'जीयन' का अर्थ 'पानी' उस शब्द की अमिषा शकि से लगाया गया । जहाँ शव के प्रधान या मुख्य अर्थ को छोड़कर किसी दूसरे अर्थ की इसलिये कल्पना करमी परती है कि किसी वाक्य में उसकी संगति बैठे, यहाँ शम्य की लक्षणाशक्ति से काम लेना पड़ता है। जैसे- मंगअंग मग जगमगत, दीप-शिखा सी देह । दिया सहामे, दो उनी गेह।