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पृष्ठ:साहित्यालोचन.pdf/३६५

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साहित्यालोचन ३४४ आलोचना में हम दूसरे आलोचकों के अध्ययन और आलोचना से कुछ लाभ अवश्य उठा सकते हैं। यदि कोई अच्छर कधि जीपन की व्याख्या करता है, तो एक असहा खोचक इमें यह ध्याच्या समझाने में सहायक होता है। कोई अच्छा आलोचक साधारण पाठको की अपेक्षा अधिक वाम-संपध होता है। उसका अध्ययन भी अधिक गंभोर और पूर्ण होता है और इसलिये वह किसी कवि या लेखक की कृति के भिन्न भिन्न अंगों पर प्रकाश डालकर हमें अनेक नई यात बतलाता और अनेक नए मार्ग विससाता है । यह हमारे मार्ग में एक अच्छे मित्र और गथ-दर्शक का काम देता है। वह हमें सिनकाता है कि अध्ययन किस प्रकार सचेत होकर और आँख खोलकर करना चाहिए। चाहे उसकी सम्मति और निर्णय से हम सहमत हो और चाहे न हो, पर इसमें संदेह नहीं कि उसकी आलोचना से हम बहुत कुछ लाभ उठा सकते है और हमारा कान बहुत कुछ बढ़ सकता है। जैसा कि हम ऊपर कह चुकं है, आलोचना से दो काम होने है। एक तो किसी कवि या लेखक की कृति की विस्तृत ज्यास्था की जाती है, और दूसरे उसके संबंध में कोई मत स्थिर किया जाता है। बहुधा आलोचक इन दोनों कार्मा को एक साथ मिला देते हैं और व्याख्या के अंतर्गत ही मन भो स्थिर कर खेते हैं। पर अब कुछ पाधारय विज्ञान यह करने लो कि आलोषक का काम केवल कृति को व्याख्या करना