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पृष्ठ:साहित्यालोचन.pdf/३६८

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साहित्य की मालोचना रहे हैं. वह कोरे वैज्ञानिक ग्रंथों के संबंध में नहीं कह रहे हैं, बल्कि साधारण साहित्य के संबंध में कह रहे है क्योकि नीति. और कला आदि की दृष्टि से गुज साहित्य पर ही विचार किया जाना है; भूगर्भ शाल, ज्योतिष शास्त्र या दूसरे अनेक शास्त्रों और वैज्ञानिक ग्रंथो का इस दृष्टि से विचार नहीं होता । भूगर्भ शास्त्र नो हम केवल यहो कमलाकर रह जाता है कि पृथ्वी का यम् रूप किस प्रकार और कितने दिनों में हुआ, अधया इसमें कितने समय में क्या परिवर्तन होता है। पर साहित्य का संबंध औषन की व्यास्था, नीति, समाज आदि अनेक बातों से होता है और इसी कारण उसके गुणों और दोषों के विवेचन की मी आवश्यकता होती है। भूगर्भ शास्त्र के ग्रंथ में भी गुण और दाप हो सकते हैं, पर उन गुणों और दोषों का पता लगाना कंवल भूगर्भ शास्त्र के पूर्ण पंडितो का ही काम है, साधारण पाठकों की शक्ति के यह वाहर है। साधारण साहित्य के संबंध मैं जहाँ गुणों और दोषों का विवेचन होगा, यहाँ विवेक या आलोचक का मन और निर्णय भी आपसे आप आ जायगा । “भित कचिहिलोकः काले सिद्धांत के अनुसार सभी लोग अलग अलग अपने मत के अनुसार किसी अंघ को अच्छा या खुग बतखाते हैं। हम जो कहानी अरुडी लगती है, संभव है कि यहो आपको बिलकुल पसंद न आये । हमारी समझ में जो नाटक किसी काम का नहीं है, उसी को और लोग लंबी चौड़ी प्रशंसा कर सकते हैं। जो मनुष्य कुछ भी समझ रखता है,