" साहित्यालोचन ३५८ व्यक्तिगत सम्मति सामने प्रारमष्टी होगी । तात्पर्य यह है कि सभी लोग अपनी अपनी योग्यता, विचार, रुचि और प्रवृत्ति आदि के अनुसार एक ही प्रय के संबंध में अपना अलम अलग विचार प्रकट करेंगे और उस दशा में इस बात का निर्णय करमा बहुत ही कठिन हो जायगा कि अमुक अंथ की वास्त- घिक महचा या उपयोगिता कितनी है अथवा वह कहाँ नक अच्छा या बुरा है। लाई जेफ ने स्काट के संबंध में जो नियंध लिसे है, उनमें से एक निबंध में उन्होंने कहा है- काम्य का मुख्य उद्देश्य मन का आनंद देना है। अतः जिस काव्य से जितने ही अधिक मनुभ्यां को आनंद मिले, वह उतना ही श्रेष्ठ है। पर यह मत सर्वथा ठीक नहीं है। तुलसीदासकृत रामायण सी लाको करोड़ो आदमी पहने हैं और उन्हीं तुलसीदास की पिनय पत्रिका से आनंद उठानवालो की संख्या अपेक्षाकृत महुत ही कम है। यदि लाई जे का अक्क मन ठीक भान लिया जाय तो फिर रामायण के आगे विनयपत्रिका का बहुत हो कम भृत्य या महत्व रह जाना है। पर जो लोग काव्य के अन् मर्मत हैं. वे कह सकते हैं कि तुलसीदास के समस्त ग्रंथो में काव्य की ष्टि से विनयपत्रिका ही सर्वश्रेष्ठ है। चंद- कांता और चंद्रकांता संतति के माधे वरजन से कपर संस्करण निकल चुके हैं। पर ठाकुन जगमोहनसिंह कत श्यामास्वप्न को, जो उससे बहुत पहले का छुपा हुआ है, आज तक दूसरे
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