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पृष्ठ:साहित्यालोचन.pdf/३८६

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के गुण ३६५ साहित्य की भाखोलना ही ठहरे, यह तो अच्छा है ही; और जो उन विकट परीक्षाओं में अनळा न ठहरे, यह साधारण या निकम्मा है। एक बात प्रसिद्ध सिर्शत है कि जो वस्तु सबसे अच्छी या उपयुक्त होती है, वही संसार में थव रहती है, और जो अनावश्यक या अनुपयुक्त होती है, पद नए छो स्थायी साहित्य जाती है । साहित्य क्षेत्र में भी इस सिद्धांत की सत्यता बहुत भली भाँति प्रमाणित होजाती है। आज यदि कोई अच्छा ग्रंथ प्रकाशित होता है,मो सर्वसाधारण मे उसका चहुत आवर होता है, और जप तक लोगों का उससे मनोरंजन होता रहता है तब तक वह पुस्तक अरावर चलती रहती है, उसका अस्तित्व परावर बना रहता है। पर जब उस पुस्तक से लोगों का मनोरंजन होना बंद हो जाता है, तब उसकी उपयोगिता ज्ञाती रहती है और उसका अस्तित्व भी नष्ट हो जाता है। जिस समय उसका स्थान प्रहण करने के लिये उससे अखट्री कोई पुस्तक साहिस्य क्षेत्र में आ जाती है, उससमय लोग उसका पढ़ना सर्वथा बंद कर देते हैं। यही नहीं चस्कि कुछ दिनों के उपरांत लोगों को इस बात का आश्चर्य होने लगता है कि किसी समय उस पुस्तक का जो आदर हुआ था, वह क्यों हुआ था। पर जो पुरन केवल सामयिक नहीं होती. जिनमें बहुत दिनों तक काम आनेवाली बात अथवा और कोई स्थायी गुण होते हैं, वे सैकड़ों और कभी कभी हजारों वणे तक बनी रहती है और लोगों के विचारों, सभ्यता और