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पृष्ठ:साहित्यालोचन.pdf/४४

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काम्य का विवेची राकि नहीं। परंतु काव्य-ग्रंथ सब पर एक सा प्रभाव डालते हैं। मनुभ्य के मनुष्यत्व-गुण-संपक्ष होमे भर से ही काग्य उसके लिये विशेष आनंद देनेवाला होता है। काम्य के लिये यह भावश्यक नहीं है कि वह किसी विशेष प्रकार के ज्ञान की अवगति कराये। उसके लिये सबसे श्रावश्यक ओर विशेष बात यही है कि वह अपने विषय तथा अपनी बटी से पढ़नेवालो के उदय मैं उस आनंद का प्रयाइ यहा दे जो रसा- नुभष या रस परिपाक से उत्पन्न होता है। अधधा दूसरे शब्दों में इस तरह कह सकते हैं कि काव्य मह है जो हृदय मै अलौकिक आनंद या चमत्कार की सृष्टि करे । काव्य वास्तव में मानव जीवन का एक चित्र है। उसका और मानव-जीवन का यडा बनिष्ठ संबंध है। किसी ग्रंथ को काच्य का पद इसी सिये प्राप्त होता है कि उसके पढ़ने से जीवन के साथ हमारा एक बनिष्ट मापा जीवन और नवीन संबंध उत्पन्न हो जाता है और यही कारण है कि काव्य मनुष्य के रदय पर इतना अधिक प्रभाव डालता है। सच पूछिये तो काव्य से ये ही वार्ते जानी जाती है जिनका अनुभव मनुष्यों ने स्वयं अपने जीवन में किया है, जिनपर उन्होंने स्वयं विचार किया है और जिनके संबंध में स्वयं उनके हश्य-पटल पर भावनाएँ अंकित हुई है। संक्षेप में हम यह कह सकते हैं कि काव्य में प्रधानता भाषा के द्वारा मानव-जीवन की अभिव्यक्ति होती है। जीनन की काम्य और