२९ काव्य का विवेचन अपने जीवन में किस प्रकार और कैले कैसे उद्योग किए, कहाँ तक उसे सफलता या विफलता और उसके ग्रंथों का उसके जीवन से कहाँतक संबंध है। यदि इन सब बातों का टीक ठीक पता लग जाय तो हमें उस कवि या लेखक के ग्रंथ अधिक रोचक और मनोरंजक जान पड़ें और हम उन्हें बड़े चाव से पढ़ें। अतएव किसी ग्रंथकार या कवि की कृति को सुचारू रूप से समझने और उससे आनन्न उठाने के लिये यह आवश्यक है कि हम उसके जोधन की मुख्य मुख्य घटनाओं से परिचित हो। परंतु साथ ही यह भी आवश्यक है कि जीवनचरित विश्वसनीय हो और उसका उपयोग विवेक पूर्षक किया जाय । बिना रन दोनों बातों के अभीष्ट-सिद्धि में यह हमारा सहायक नहीं हो सकता। जीवनचरितों में कभी कभी इतनी तुच्छ और अना- संगिक बातें निम्न दी जाती हैं जिनका कुछ भी मूल्य नहीं होता और जो चरित-नायक के यथार्थ जीवन पर कुछ भी प्रकाश नहीं डाल सकीं। तुलसीदास जी के रामचरितमानस का महत्व जानने के लिये यह आवश्यक नहीं कि हम यह भी जान ले कि उन्होंने कितने मुर्दे जिला दिए ये अध्वा उस प्रसिह पिशाच से किस भाषा में बात-चीस की थी। ये ऐसी पाते हैं, जो रामचरितमानस को समझने और उससे आनंद उठाने में हमारी सहायक नहीं हो सकती। पर हाँ, अपनी सहधर्मिणी के मायके चले जाने पर अत्यंत आसक्ति के कारण, उनका उसके पीछे पीछे दौड़ा आना एक ऐसी घटना है
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