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पृष्ठ:साहित्य का इतिहास-दर्शन.djvu/११७

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साहित्य का इतिहास-दर्शन

(आ) स्थापत्य-औरंगजेब द्वारा कला का निरादर-मन्दिरों का ध्वंस-हिन्दू- स्थापत्यकला की दुर्गति-नवाबों का कलाप्रेम-राजस्थान के राजमहल-उत्क्ृष्ट कलाभाव का अभाव-निक्ृष्ट अनुकरण-निर्जीवता ।

(इ) चित्रकला-जहाँगीर और शाहजहाँ-विदेशी चित्रकला पर भारतीय प्रभाव- चित्रकला की विभिन्न दैलियाँ-क्रमिक अधःपतन-नारी-सौन्दयं का चारुचित्रण-चित्रकला की दो धाराएँ-ह्वासोन्मुखी राजसी धारा-सचेत जनप्रिय धारा ।

(६) संगीत-असंतोषजनक स्थिति-मौलिकता का अभाव-ओऔरंगजेब-संगीत का चरम अपकर्ष-कलावन्त राजाओं और नवाबों की शरण-मुहम्मदशाह-संगीतकला के पुनरुज्जीवन का प्रयत्न-संगीतशास्त्र के कुछ ग्रन्थ-संगीतकला-विलास का उपकरण मात्र ।

(ख) रीतिकाव्य का शास्त्रीय पृष्ठाधार

रीतिक्षासत्र का आरंभ-- रस-सम्प्रदाय--

“रस” का अथं और इतिहास-'रस' की परिभाषा-रस की स्थिति-भारतीय रससूत्र के प्रमुख व्याख्याक/र-भट्टलोल्लट-श्रीशंकुक-भट्टनायक-अभिनवगुप्त-साधा रणीकरण-रस का स्वरूप-भाव का विवेचन-मूल प्रवृत्तियाँ और प्रवृत्तिगत भाव-भावों का वर्गीकरण- रीतिकालीन आचार्यों पर रस-सम्प्रदाय का प्रभाव ।

अलंकार-सम्प्रदाय-

अलंकार-सम्प्रदाय॒ का आरंभ और विकास-भामह और दण्डी-सर्वप्रमुख आचार्य रुद्रट-बाद के आचारय-अलंकार की परिभाषा और धर्म-अलंकार और अलंकार्य-अलंकारों का मनोवैज्ञानिक आधार-रसान्‌ भूति में अलंकार का योग-रीतिकालीन आचार्यों पर अलंकार-सम्प्रदाय का प्रभाव ।

रीति-मम्प्रदाय--

रीति-सम्प्रदाय के प्रतिष्ठापक वामन-परवर्ती आचार्य-रीति की परिभाषा और स्वरूप-पादचात्य साहित्य-शास्त्रियों की 'शैली'-रीति और गुण-गुणों की मनोवैज्ञानिक स्थिति-रीति और दोष-रीति-गुण-दोष का रस से संबंध-संस्कृत का रीति-सम्प्रदाय और हिन्दी के रीतिकालीन ard ।

वक्रोक्ति-सम्प्रदाय--- ‘

वक्रोक्ति के प्रवत्तंक कुन्तक-क्या' यह सम्प्रदाय है ?-वक्रोक्ति का स्वरूप-कुतंक की वक्रीक्ति और क्रोचे का अभिव्यंजनावाद-रीतिकालीन आचार्यों पर वक्रोक्तिवाद का प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष प्रभाव-प्रभाव की नगण्यता के कारण ।

ध्वनि-सम्प्रदाय--

ध्वनि-सम्प्रदाय का आरंभ-अतिष्ठापक ध्वन्यालोककार-ध्वनि का आधार और स्वरूप-ध्वनि के विरोधी आचाय॑-ध्वनि के समर्थक आचार्य-व्यंजनाशकित्त की पूर्ण प्रतिष्ठा- ध्वनि और रस-ध्वनि और अलंकार-ध्वनि में अन्य सिद्धान्तों का समाहार-रीतिकालीन आचार्यों पर प्रभाव ।

नायिका-भेद-- नायिका-भेद का पूव॑वृत्त-इस विषय के प्रमुख आचाय-नायिका-भेद का मनोवैज्ञा- निक आधार-तायिका-भेद-परम्परा का रीतिकालीन आचार्यों पर प्रभाव ।