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(5) (६) (१०)
साहित्य का इतिहास-दर्शन
परुष शब्दावली का प्रयोग-संयुक्ताक्षरों की बहुलता । संवाद । कवि-परिचय ।
(ख) प्रशस्ति-काव्य--
आश्रयदाता की प्रदंसा-विशेषतया शौर्य और दान की ।
संवाद की योजना-पौराणिक रूप देने का प्रयास ।
ऐश्वर्य, धाक, सैन्य-अस्थान, राजसभा आदि के वर्णनों की प्रधानता । अलंकारों का चमत्कार-अतिशयोवित, रूपक, उपमा आदि की प्रधानता ।
शत्रु-पक्ष के भय, त्रास आदि का विशेष वर्णन ।
प्रबंध का अभाव, मुकतकों की प्रचुरता ।
प्रसंगोदभावना |
कवित्त, सवैयों, छप्पयों की बहुलता ।
भाषा में प्रवाह ।
छंदानुसार दाब्द-निर्माण |
कवि-परिचय
(ग) afte वीरकाव्य---
(१) (२) (३) (४)
लोक रक्षक देवी-देवताओं की कथाएँ । अत्याचारियों का विनाश और मानवता की रक्षा । प्रबंध और मुक्तक दोनों प्रकार की रचनाएँ । कथा-अवाह ।
व्यक्ति-विशेष के युद्धों का वर्णन ।
युद्धों का सांगोपांग चित्रण ।
उक्ति और रण-कौशल का चमत्कार ।
सत्य, दान, दया आदि धार्मिक भावनाओं की पोषक पौराणिक कथाएँ | उपदेश की प्रधानता ।
भाव-व्यंजना की प्रधानता ।
चलते छंदों का विधान ।
भाषा, सीधी-सादी, प्रवाहपूर्ण ।
चमत्कार-प्रदर्शन का अभाव ।
कवि-परिचय ।
(घ) अनूदित वीर काव्य--
(१) (२) (३) हर) (x) (६) (७) (5)
दुर्गा सप्तताती और महाभारत के अनुवाद । अनुवाद की विशेषताएँ-दो प्रकार के अनुवाद । केवल अनुवाद के लिए-भावों के चित्रण के लिए । भावों को नये ढंग से रखना ।
सरलता की प्रवृत्ति ।
संवादों की न्यूनता ॥।
वर्णनों की प्रचुरता |
युद्धवीरता का विशेष वर्णन ।