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पृष्ठ:साहित्य का इतिहास-दर्शन.djvu/१२३

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साहित्य का इतिहास-दर्शन

परुष शब्दावली का प्रयोग-संयुक्ताक्षरों की बहुलता । संवाद । कवि-परिचय ।

(ख) प्रशस्ति-काव्य--

आश्रयदाता की प्रदंसा-विशेषतया शौर्य और दान की ।

संवाद की योजना-पौराणिक रूप देने का प्रयास ।

ऐश्वर्य, धाक, सैन्य-अस्थान, राजसभा आदि के वर्णनों की प्रधानता । अलंकारों का चमत्कार-अतिशयोवित, रूपक, उपमा आदि की प्रधानता ।

शत्रु-पक्ष के भय, त्रास आदि का विशेष वर्णन ।

प्रबंध का अभाव, मुकतकों की प्रचुरता ।

प्रसंगोदभावना |

कवित्त, सवैयों, छप्पयों की बहुलता ।

भाषा में प्रवाह ।

छंदानुसार दाब्द-निर्माण |

कवि-परिचय

(ग) afte वीरकाव्य---

(१) (२) (३) (४)

लोक रक्षक देवी-देवताओं की कथाएँ । अत्याचारियों का विनाश और मानवता की रक्षा । प्रबंध और मुक्तक दोनों प्रकार की रचनाएँ । कथा-अवाह ।

व्यक्ति-विशेष के युद्धों का वर्णन ।

युद्धों का सांगोपांग चित्रण ।

उक्ति और रण-कौशल का चमत्कार ।

सत्य, दान, दया आदि धार्मिक भावनाओं की पोषक पौराणिक कथाएँ | उपदेश की प्रधानता ।

भाव-व्यंजना की प्रधानता ।

चलते छंदों का विधान ।

भाषा, सीधी-सादी, प्रवाहपूर्ण ।

चमत्कार-प्रदर्शन का अभाव ।

कवि-परिचय ।

(घ) अनूदित वीर काव्य--

(१) (२) (३) हर) (x) (६) (७) (5)

दुर्गा सप्तताती और महाभारत के अनुवाद । अनुवाद की विशेषताएँ-दो प्रकार के अनुवाद । केवल अनुवाद के लिए-भावों के चित्रण के लिए । भावों को नये ढंग से रखना ।

सरलता की प्रवृत्ति ।

संवादों की न्यूनता ॥।

वर्णनों की प्रचुरता |

युद्धवीरता का विशेष वर्णन ।