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पृष्ठ:साहित्य का इतिहास-दर्शन.djvu/१३६

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अध्याय १३

कवियों के नाम व विषय

१४ कालिदास aft राजत गँभीर रोमावली वनतीर मनतीर रसना ललित कल वानी को आसन है राते सेत फूलन की उलही ललित पांति योवन नृपति जाके परस पुनीत भये लाल करताल कर गहिके नवेली के हाथ हँसि दीन्हो भीति अन्तर परसि प्यारी देखे अनदेखे हरि तजत न अंक तेरो दाबि दाबि दशननि रस के सबाद के के खरी खण्ड तीसरे रँगीलीरंग रावटी में सहज भरोखा मांभ बोलत रसीली तेरे चपला के ऐसे चारु चमके है छबि पूंज चन्दमई चम्पक जराव जरकस मई कानन में कुन्दन के नगन जठित सोहै करत उचाट पाट मंत्रन को मंत्र मानो नजर परेते उलहत उर आनंद है पहिलेही ललन नबेली अलबेली रची

१५ फाशीरास कवि मन्दही चपत इन्दबधू को बरण होत कारे सठकारें फठकारे चढकारे नेकु गरकि गुलाब नीर चीर सों लपटि करै

१६ कमलापति कवि जिनसोहे कहा चली पंकज की बरगोल सुडौल बनेहें अमोल ढरे लखिक वहि प्राण पियारे के कण्ठ को लखी आज अचानक इन्दुमुखी नहिं जानिये कौने बिरड्चि रचे मदमाती मनोज के आसवन सों

to arg कवि सोने के सितून ब्रजराज मन मन्दिर के अवनि अकाझ के प्रकाशित बनाये पला काननलों अँखिया हें तिहारी पीके प्राणप्यारे प्रेम परम सुजान जी के

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