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पृष्ठ:साहित्य का इतिहास-दर्शन.djvu/१४४

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अध्याय १

कवियों के नाम व विषय

सकुच समेत हल के सुन्दर wale Ye सुन्दर सुवेष रुचि राजत त्रिवेष qa सरस श्यृंगार रस सारही को धार यह रागिनी की मण्डली रची है कामदेव कैधों रूप की नदी ते निकसत मन्द मन्द कैधों यौवन सरोवर में अलक भलक कैधों कैधों बिधु ऊपर बघूक के कुसुम धरे कैधों बेनी पन्नगी के फण दुहँ ओर कोमल कुटिल नीलमणि की शिखा से चल कच अभिराम ज्योति यमुनाकी जीते लेत प्यारी कि ठोढी को बिन्दु दिनेश

पहिरे बनाय सितभूषण दिनेश सब

हरी अच्छ लच्छ करतलनि समान स्वच्छ अंग अंग भूषण जड़ाऊ के जगमगात भूषण जरायन के पाँयन अनोट ओट

५६ द्विजकवि (मन्नालालरूदार्म्मा, फाशी) कोऊ कहे जपा जावक रंगकी कैधों मानसर के विमल कमल दोऊ के बिधि कज्चन गार सिगार के कम्बु बिलोकतही जिहिको मीठी अनूठी कढ़ें बतियां मज्जन के तिय बैठी अगार बैठी शंगार श्ंगार के बाल Be BT छवालों छबीले घुंघवारे बार war at cae care ef gear st

६० farm कवि गौन को नवेली तू भवन ते न बाहर हो

६१ ट्विजराज कवि रूप की राशि में के रसराज को बाजी चपलाई ताममें मैत असवार गाढ़ो चन्दन की खौर गोरे गात ज़्यों कलमलात'

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