अध्याय १३
कवियों के नाम व विबय सांवरी सारी सखी संग सांवरी
दूले इते घूमके सुभूम के जवाहिर के जाही जुही मल्लिका चमेली मनमोदनीकी जाहिर जागति सी यमुना
जगजीवन को फल जानि पर्ुयो गुलगुल कंद के सुमन्द करि दाखन को* THA HI FH YAR BC TET FY कैधौं रूपराशि में श्वृंगार रस अंकुरित* चहचही चहल चहुँधा चारु चंदन की चह्चही चुगके चुभी है चौक चुम्बन की
७८ परसराम कवि जपाक कुसमता की छबिके चतुरमाण कैधों रूप धरणी में राजत युगल खण्ड कैधों रसनायक बिहंगम के यूग पच्छ
७६ प्रसाद कवि दुगमीन बाभिबे की बंशी ये सची है कंधों
८० पारस कवि कीधोौं श्रृंगार के बारिज को दल
८१ परमेश कवि कोयन कौ कुरसी में करिके कुमाच बैठी
८२ परम कवि राजत अमी के मदछाके कालकूट किधौों
८रे पूखी कवि मंजन के तिय बैठी अवास में शरद के घन में ज्यों अरुण उदोत द्युति
८४ ब्रह्म कवि एक समय बृषभानसुता ऐन सुरा बिंदुली विधु भाल में बाल चले अलबेली सी चाल सेज ते ठाढ़ी भई उठि बाल
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(टोटल १६)
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(डोटल ४)