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पृष्ठ:साहित्य का इतिहास-दर्शन.djvu/१५८

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अध्याय १३ १४५

कवियों के नाम व विषय पृष्ठ पंक्ति नम्बर १३४ छाल मुकुन्द कवि कनका चल कन्दर अन्दर ते ४६ १५ 5 (ठोटल १) १३५ लीलाधर कवि ललित बलित लोटे परी जाके बीच कैधों ३६ ११ ३ पाव जो परस ताको होत है सरस भाग ७७ २५ ७ (टोटल २) १३१६ शम्भु कवि बिब प्रवाल बँधूकजपा ६ ६ २१ बैठी मलीन अली अवली कि ४६ १० ७ बिम्ब औ प्रबालहू बेंघूक कवि बरणत RWS २३ १५ eat क्षुद्रधंटिका रतनकी ललित शम्भु RR 3 कैधौं तेरे कुचन पै ्यामता सुहाई प्यारी ६५... १४ ७ आज गुपाल लखी वह बाल ७१ २ १ दाने मनोहर सान घरे बहेँ ७१ ७ २ लाडिली के कर की मेहंदी ७८ ts Ro लाडिली के कुच देखतही ६१ a ५२ हारे करी कुम्भ तो लपेठे छार वन बसे fo २१५ ४७ हठि मांगत बाठ किधौं लछिनी को २१० १७ १८ जन्‌ इन्दु उदो अवनीतल में २११ R २० जीति रति कार्माह करति रस रीति तहाँ २१६ ५ १६ जंग करिबे को ठान ठानी है अनंग ४२ ११ ७ सोगी करे योगी औ बियोगी सब भोगी करे ¥R ¥ & सिंह भ्रमे वन भांवरी देत RR १७ RX सोबे लोग घरके बगरके किवाँर खुले रीं४ष २३ १०३ श्रीफल सरोज कैधों कोमल करारे कुच ys vO ३५ श्रीफल कंज कली से बिराजत Yo रे RY Bet we wer fale we az BE VK ७० ware चली नंदनन्दनपे अनन्दभरी २५० १ १२५ राधिका रूप विरंचि रच्यो २५६ १ (६४३ (टोढल २२) १३७ द्ाम्भुराज कवि तेरे पगबाल कैधौँ जावक दयोहैलाल ७ & २६ तिलको कुसुम ताकी समकहा कीजियत १५१ Re १५ राधिका के नाथकी अकथ कथासुनि जाहि १५३ RR RR राधिका के भुजन की भूरि युति लखो लाल ७५ & १५४

नूतन हू के नूतन सरस सुकुमार पात es & भर