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साहित्य का इतिहास-दर्शन
| कवियों के नाम व विषय | पृष्ठ | पंक्ति | नम्बर |
| पायजेब जेहर जराऊजरी जोरीहठी | ६७ | २ | ११ |
| अतर पुतायो मढ्यो महल सुगंधन सों | २२१ | २ | ५ |
| अतर पुतायो चौक चन्दन लिपायो | २२१ | ८ | ६ |
| आजहो गईती बीर सहज निकुंजन में | २२१ | १४ | ७ |
| चामीकर चौकीदर चम्पक बरणहठी | २३५ | १२ | ६४ |
| चन्दसो आनन कंचनसो तन | २३५ | २५ | ६६ |
| जातरूप तखत पर बैठी रूपराशि राधे | २४१ | २३ | ६१ |
| सारी जरतारी लगी मणिन किनारी द्युति | २४७ | ११ | ११४ |
| सांझ हो गई थी बीर भौन वृषभानजी के | २४७ | १७ | ११५ |
| सारी जरतारी लगी मणिन किनारी त्योंही | २४७ | २३ | १६ |
| (टोटल २८) | |||
| १५७ हरिसेवक कवि | |||
| त्रिबली तरिनी तटकी पुलि नाई | २७ | १० | ११ |
| चुरियान हूँ में चपि चूर भयो | ८४ | १७ | १ |
| दिन रैनि में भावन के रचे गीत | ६७ | १६ | १४ |
| (टोटल ३). | |||
| १५८ हरिकेश कवि | |||
| लरकी लरक पर भौंह की फरक पर | ३० | १० | ५ |
| (टोटल १). | |||
| १५९ हरीराम कवि | |||
| लागे लाल चौकी में बिराजे हरीराम कहै | ४५ | १ | १ |
| (टोटल १). | |||
| १६० हरिऔध कवि | |||
| सुन्दर सूधी सुगोल रची विधि | ८५ | ५ | ३ |
| वर विद्रुम में कहाँ लाली इती | १२६ | ४ | १६ |
| (टोटल २). | |||
| (नीचे लिखे हुए कवित्तों में कवियों के | |||
| नाम नहीं मालूम पड़ते हैं।) | |||
| कोमल विमल मंजु कंजसे अरुण सोहै | १ | १३ | २ |
| करकंजन जावक दै रुचि सों | २. | १५ | ५ |
| कैसी सुढ़ार गढ़ी है सुनार | १० | १२ | ३ |
| करजी कहा तू वृग अंजन वै राधे | १६ | १७ | ४ |
| कदली दल है सुऊषम सहित इतो | २१ | १४ | २ |
| कंचन के कमनीय किघौ | २३ | २१ | ११ |
| कीन्हों कमलासन कलानिधि बदन तेरो | २६ | १६ | २ |
| क्यों मनमूढ़ छबीली के अंगनि | ३५ | ९ | ८ |
| कोमल अमल दल कमल | ३५ | २२ | १ |