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पृष्ठ:साहित्य का इतिहास-दर्शन.djvu/१६३

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१५७०
साहित्य का इतिहास-दर्शन
कवियों के नाम व विषय पृष्ठ पंक्ति नम्बर
पायजेब जेहर जराऊजरी जोरीहठी ६७ ११
अतर पुतायो मढ्यो महल सुगंधन सों २२१
अतर पुतायो चौक चन्दन लिपायो २२१
आजहो गईती बीर सहज निकुंजन में २२१ १४
चामीकर चौकीदर चम्पक बरणहठी २३५ १२ ६४
चन्दसो आनन कंचनसो तन २३५ २५ ६६
जातरूप तखत पर बैठी रूपराशि राधे २४१ २३ ६१
सारी जरतारी लगी मणिन किनारी द्युति २४७ ११ ११४
सांझ हो गई थी बीर भौन वृषभानजी के २४७ १७ ११५
सारी जरतारी लगी मणिन किनारी त्योंही २४७ २३ १६
    (टोटल २८)
१५७ हरिसेवक कवि      
त्रिबली तरिनी तटकी पुलि नाई २७ १० ११
चुरियान हूँ में चपि चूर भयो ८४ १७
दिन रैनि में भावन के रचे गीत ६७ १६ १४
    (टोटल ३).
१५८ हरिकेश कवि      
लरकी लरक पर भौंह की फरक पर ३० १०
    (टोटल १).
१५९ हरीराम कवि      
लागे लाल चौकी में बिराजे हरीराम कहै ४५
    (टोटल १).
१६० हरिऔध कवि      
सुन्दर सूधी सुगोल रची विधि ८५
वर विद्रुम में कहाँ लाली इती १२६ १६
    (टोटल २).
(नीचे लिखे हुए कवित्तों में कवियों के      
नाम नहीं मालूम पड़ते हैं।)      
कोमल विमल मंजु कंजसे अरुण सोहै १३
करकंजन जावक दै रुचि सों २. १५
कैसी सुढ़ार गढ़ी है सुनार १० १२
करजी कहा तू वृग अंजन वै राधे १६ १७
कदली दल है सुऊषम सहित इतो २१ १४
कंचन के कमनीय किघौ २३ २१ ११
कीन्हों कमलासन कलानिधि बदन तेरो २६ १६
क्यों मनमूढ़ छबीली के अंगनि ३५
कोमल अमल दल कमल ३५ २२