अध्याय १३ १५७ (३) नायका सर्वसंग्रह -- इसमें नायकाभेद के प्रायः दो हजार कवित्त सवैया रहेंगे ॥ बीचे लिखे हुए ग्रन्य प्राचीन कवियों के बनाये हुये जिन महाशयों के पास हस्तलिखित छ हुये हो और मुझे कृपापूर्वक देवें तो मैं उनको उनकी इच्छानुसार पारितोषिक दे सक्ता हूं मिहरवानगी करके नीचे लिखे पते से पत्र भेजे । प्रत्यों के नाम (कालिदासहजारा-कालिदास कविकृत ) ( भूषणहजारा - भूषण कविकृत) (किशोरसंग्रह - किशोरकविकृत ) ( सतकविगिराबिलास - बलदेवकबिकृत ) ( हनूमान नखशिख -- खुमान कबिकृत ) (रागसागरोद्भव रागकल्पद्रुम — कृष्णनन्द व्यासदेवकविकृत यह कलकत्ता का छपा हुआ है) (रहीम कवि के दोहा) या बिहारी कवि की सतसई के ऊपर करीब बीस टीका हुये हैं वह भी हमको चाहिये ॥ बाबू परमानन्द सुहाने बम्बई मीडोमरचन्ट कोतवाली के पास जबलपुर सिटी, मध्यप्रदेश" "नवशिल हजारा का सूचीपत्र पृष्ठ तादाद दोहा तादाद क० व० स० ३४ नम्बर विषय १ अथ चरण वर्णन १ २ अथ पग अंगुरो ब० E ५ ३ अथ पद अंगुरो भूषण सह ब० ११ ४ अथ पद नख ब ० १३ ५ अथ पग तल ब० १४ ५ ६ अथ एड़ी ब० १६ ७ अथ मुरबा भूषण राहिल व ० १० ८ अथ गुलुफ ब १५ 8 अथ पिडुरी ब० २० १० अथ जंघ ब० २० १३ ११ अथ नितम्ब ब० २४ १२ १२ अथ क्षुद्रघंटिका ब० २० ३ १३ अथ कटि ब० २८ १८ १४ अथ नाभी ब० ३३ E १५ अथ उदर ब० ३५ ५ १६ अथ त्रिवली ब० १७ अथ रोमराजी ब० १८ अथ रोमावली ब० १६ अथ हृदय ब० २० अथ कुच तरहदी ब० २१ अथ कुच ब० 22222 w ३० १२ ४० १३ ४४ १२ ४० २ ४८ २ ४६ ५०
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