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पृष्ठ:साहित्य का इतिहास-दर्शन.djvu/१७२

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२। परमानंद सुहाने का नखशिख हजारा” मुझे अपने छात्र, और अब सहयोगी, Wo अनंतलाल चौधरी, पटना कॉलेज से अवलोकनार्थ प्राप्त हुना है, जिसके लिए में उनका क्तज्ञ हूँ ।

इस हजारा क॑ प्रारंभ में निम्नोद्ृत पुस्तक-परिमाण आदि हैं--

“सखशिख हजारा”

परमानंद सुहाने संग्रहीत ॥

जिसमें श्री जगजुननी राधिकाजी महारानी के नखशिख का वर्णन पद्माकर, पजनेस, परताप, प्रवीन, att, Tata, बलभद्र, ब्रह्म, भूषण, भगवन्त, मतिराम, मुबारक, रघुराज, रघुनाथ, रसखानि, शम्भु, हठीदिवाकर, सेनापति, दूलह्॒विजराज, ठाकुर, चिन्तामणि, शिवनाथ, गिरिधारी, ग्वाल, केशवदास, किशोर, कालिदास, कविन्द, श्रीपति इत्यादि कवियों के बनाये हुए २३७ दोहा व १००० सवैया कतवित्तों में वर्णित हैं ॥

जिसको श्री बल्लभ कुल सेवक वैश्यकुलोत्पन्न बंगालीलाल सुहाने के पुत्र परमानन्द सुहाने ने सर्वेकाव्यानु- रागियों के अवलोकनाथ अतिपरिश्रम करके अनेकानेक मुद्रित व हस्तलिखित ग्रन्थों से चुनकर संग्रह किया ॥

प्रथम बार

लखनऊ मुंशीनवलकिश्ोर (सी० आई० ई०) के छापेखाने में छपा दिसम्बर सन्‌ १८६३ ई० ॥ नखशिख हजारा के कवियों का सूचीपत्र ॥