अध्याय १३ १७४.
[ १६३] गोपाल कवि २ स०, प्राचीन, १७१५ वि०; ग्रि०, मित्रजित सिंह के पृत्र और कल्याणसिह के आश्रित । [१६४ ] गोपाल कवि स०, कायस्थ, रीवाँ, बघेलखंडवासी, १६०१ वि०, गोपालपचीसी ।
[१६५] गोपाल बंदीजन स०, चरखारी, बूंदेलखंडी, १८८४ वि० । [१६६ ] गोपाललाल कवि स०, १८४५२ वि० ।
[१६७] गोपालराय कवि कि०, रचनाकाल १८८५-१६०७ वि०। [१६८ ] गोपालशरन राजा स०, १७४८ वि०, विमबंध घटना नामक सतसई की टीका । [१६६ ] गोपालदास To, THAT; fro, WT Wwe Fo; fo, १७५५ वि०, रासपंचाध्यायी की रचना । [१७०] गोपा कवि * सं०, १५६० वि०, रागभूषण, अलंकारचन्द्रिका; कि०, कवि का नाम गोप है, गोपा नहीं, पूरा नाम संभवत' गोपालभट्ट; ओरछा के राजा पृथ्वीसिंह के दरबारी कवि (१७६३-१८०६ वि० ।) [१७१] गोकुलनाथ स०, बंदीजन, वनारसी कवि रघुनाथ के पुत्र, १८३४ वि०, चेतचंद्रिका, गोविंद सुखद विहार, भारत अष्टादश पर्व--हरिवंश पर्यन्त । [१७२] गोपीनाथ स०, बन्दीजन, बनारसी गोकुलनाथ के पुत्र, १८५० वि०; ग्रि०, १८५२० ई० के लगभग उपस्थित । [१७३] ग़ोकुल बिहारी स०, १६६० वि०; कि०, अस्तित्व संदिग्ध ।