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पृष्ठ:साहित्य का इतिहास-दर्शन.djvu/१९४

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साहित्य का इतिहास-दर्शन

[२४४८] छेदी राम कवि 2८५६४ वि०, कविनेहनाम । [२४६] छतन्नकवि १६२५ वि०, धिजय मुक्तावली; कि०, १७५७ वि०। [Ro] errata 2 Ho, वरदीजन, डलमऊ के, १५८२ वि० । [२५१ J atatag fata स०, राजा गोंडा के भाईत्रन्द, १७८८ वि०, छन्द श्वृंगारग्रथ, साहित्य सुबानिधि, अलंकार-

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निधि; ग्रि०, १७७० ई० के आसपास उपस्थित । [२५२] युगलकिश्ोर भट्ट स०, कैथलवासी, १७६५ वि०, [२५३] यूगलकिशोर कवि [२५४] युगराज कवि [२५५] यूगलप्रसाद att [२५६ ] युगुल कवि स०, १७५४ वि०; !ग्र०, बिना तिथि दिये हुये जुगुलदास कवि नाम से शिवश्तिह द्वारा

उप्जिखित thr भो संभवत' थे ही; कि०, इन्होने १८२१ 4० में 'हितचौरासी' की टीका की थी ।

[२५७] जानको प्रसाद स०, पंत्रार, जोहवेनकटी, जिले रायबरेलों, रघुवीर ब्यानावली, राम नवरत्न, भगवती विनय, रामनिवास रामाथण, रामानन्द विहार, नीतिविलास; प्रि०, १८८३ ई० में जीवित । [२५८] जानकी प्रसाद २ [२५६] जानफीप्रसाद कवि स०, वनारसी ३, १८६० ब्रि०, रामचंद्रिका-दीका, युक्ति रामायण; ग्रि०, १८१४ ई० में

उपस्थित ।