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पृष्ठ:साहित्य का इतिहास-दर्शन.djvu/२०७

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अध्याय १३ १६५

[४०६ ] नाथ ५ स०, हरिनाथ गुजराती, काशीवासी, १८२६ वि० । [४१०] नाथ ६ [४११] नाथ कवि स०, ब्रजवासी, गोपाल भट्ट ऊँच गाँत् वाले के पुत्र, १६४१ वि०। [४१२] नवलूकिशोर कवि [४१३ ] नवलकबि [४१४ ] नवर्लासह स०, कायस्थ, झाँसी क॑ निवासी, राजा संथर के नौकर, १६०८ ब्रि०, नामरामायण और हरिनामावली के रचयिता | [४१५]. नवलरूदास स०, क्षत्रिय, गूडगाँव, जिला बाराबंकी, १३१६ वि०, ज्ञानसरोवर; कि०, रचनाकाल १८६७३--१६२६ वि० | न [४१६ ] नीझाधर कवि स०, १७०५ वि०; कि०, वस्तुतः लोलाधर । [४१७] निधि कवि स०, १७५१ वि० । [४१८ ] निहाल प्राचीन स०, १६३५ वि० । [४१६ ] नारायण स०, बन्दीजन, काकपुर, जिला कानपुर | १८०६ वि०। [४२० ] परसाद कवि स०, १६८० वि०; कि०, पूरा नाम बेनीप्रस्ताद, १७६५ वि० में नाथिकामभेद ग्रंथ 'रस- समुद्र' की रचना । a ol