१६६ साहित्य का इतिहास-दशन
[४२१ ] पद्माकर भट्ट स०, बाँदावाले, मोहनभट्ट के पुत्र, १८३८ वि०, ग्रि०, १८१५ ई० में उपस्थित; कि०, जन्म १८१० वि०, मृत्यु १८६० वि० । [ ¥82] पजनेश कवि स०, बुदेलखडी, १८७२ वि०, मशध्ुप्रिया, नवणिख; ग्रि०, जन्म १८१६ Fo |
[४२३ | परताप साहि स०, वदीजन, बुदेलखडी, रतनेश कवि के पुत्र, १७६० वि०, काव्य-बिलास, भाषा-भूषण, नख-शिख, विन्नार्थ कौमुदी; ग्रि०, १६३३ (? ) में उपस्थित, कि०, रचनाकाल १८८२-६६ बि० भाषा-भूषण, जिसकी इन्होंने टीका की श्री, जोधपुर नरेश जरवत सिह की क्ृति है, विज्ञार्थ कौमुदी' का शुद्ध नाम व्यग्यार्थ कौसुदी' है । [ ४२४ | प्रवीणराय पातुरी स०, उड़छा, बुदेलखइ-वासिनी, १६४० बि० ।
[४२५] प्रवीगकविराय २ Ho, १६६२ वि० | [४२६ ] परमेशकवि प्राचीन Ho, १६६८ वि० । [४२७ ] परमश स०, बंदीजन, सताताँ, जिल रायबरेली, १८९६ वि० । [४र८ ] प्रेमसली To, Keke वि० । [४२६ ] परम कवि स०, बं रोजन, गहूँवे के वुद्देलखण्डो, १८७७१ वि०, नखशिख | [४३०] प्रेमी यमन स०, मुसलमान, दिल््लोवाले, १७६८ वि०, अनेकार्थ नाममालाकोष । [४३१] परमानन्द
स०, लल्लापुराणीक, अजयगढ़, बुरेलखडी, १८६४ वि०, नखशिख |