अध्याय १३ १६७
[४३२] प्रागनाथ कवि To, MAT, बैसवारे के, १८५१ वि०, चकाव्यूह इतिहास । [४३३ ] परमानन्ददास स०, ब्रजवासी, बल्लभाचार्य्य के शिष्य, १६०१ बि०; ग्रि०, १५५४० ई० में उपस्थित, रचना रागकल्पद्रुम । [४३४ ] प्रसिद्ध कवि स०, प्राचोन, १५६९० बि०; फि०, १५६० ई० उपस्थिति-काल । [४३५] प्रधान केशवराथ कवि स०, शालहोत्र-भाषा । [४३६] sara aft स०, १७७४५ fao | [४३७] पंचम कवि स०, प्राचीन, बंदीजन, वृंदेलखंडी, १७३५ वि०; ग्रि०ण्, १६५० ई० में उपस्थित; कि०, १७२२-८८ वि० । ॥ [ ४३८] पंत्रम कवि २ स०, नवीन, बंदीजन, अजग्रगढ़-निवासी, १६११ वि०; ग्रि०, अजयगढ़ के राजा गुम्तानसिंह के दरबारी कवि; कि०, गुमानर्सह का शासनकाल १८२२-३५ वि० । [४३६ ] प्रियदास स्वासी स०, वृन्दावनवासों, १८१६ वि०; ग्रि०ण, १७१२ ई० में उपस्थित । [४४० ] पुरुषोत्तम कवि स०, अंदीजन, बुंदेलखंड, १७३० वि०; ग्रि०, १६५० ई० में उपस्थित; कि०, १७३० fao | [४४१] were ata
To, १७०१ थि०; कि०, १६६१ वि० के आसपास बैताल-पचोर्सा/ नाश्क ग्रंथ अकबर के राज्यकाल (१६१३-६२ वि०) में लिखा।