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पृष्ठ:साहित्य का इतिहास-दर्शन.djvu/२१७

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अध्याय १३ २०५

[ ५२८] बालक्ृष्ण त्रिपाठी स०, बलभद्व जू के पुत्र और काशिनाथकवि के भाई, १७८८ वि०, रसचन्द्रिका; ग्रि०, १६०० ई० में उपस्थित । [५२६ ] बालकृष्ण कवि [५३० ] बोधोरास कवि [५३१] बुधसेन कवि [५१२ ] बिन्दादत्त कवि [५३३] बन्दन कवि [५३४ ] बंदन पाठक स०, काशीवासी, मानसशंकावली ; ग्रि०, १८८३ ई० में जीवित । [aay] ब॒न्दाबन कवि [५३६] बिशेदवर कवि [५३७] fags af [५३८] बारन कवि é स०, भोपालचाले, १७४० वि०, रसिकविलास; कि०, रसिकविलास की रचना १७३७ बि० में और एक अन्य ग्रंथ-रत्नाकर की १७१२ वि०। [ ५३६ ] बुन्दा कवि [ ५४० ] aster कवि Ho, १७०८ वि०; कि०, दादूजी के शिष्य । 5. [५४१] बुधरास कवि स०, १७२२ वि० ।