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पृष्ठ:साहित्य का इतिहास-दर्शन.djvu/२२०

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Red साहित्य का इतिहास-दर्शन

[५६७ ] बेनीदास कवि स०, बंदीजन, मेवाड़-देश के निवासी, १८६२ वि०; ग्रि०, मेवाड़ के इतिहास-लेखकों में थे । [ ५६८ ] बावेराय कवि स०, बंदीजन, डलमऊवाले, (८५४२ वि० । [ ५६६ | भूषण त्रिपाठी स॒०, टिकमापुर, जिला कानपुर, १७३८ वि०, शिवराजभूषण, भूषणहजारा, भूषण-उल्लास, दृषण-उल्लास । [ Yiso है| भगवतरसिक स्र०, वुन्दावन-निवासी, माधवदासजी के पुत्र, हरिदासजी के शिष्य; कि० १७३०-५० वि० | L 49%] भगवन्तराय कवि स०, सातों काण्ड रामायण कवित्तों में; ग्रि०, १७५० ई० में उपस्थित; कि०, भगवन्त राब खीची और भगवन्त कवि एक ही कवि, भगवन्त कवि इन से भिन्न हे । [५७२] भगवन्त कवि [ ५७३ ] भगवान कवि « [५७४] भगवतीदास स०, ब्राह्मण, १६८२ वि०, नासिकेतोपाख्यान, भत्तृंहरिशतक कवित्तों में । [ ५७५] भगवानदास निरंजनो [ ५७६ ] भगवानहित रामराय [५७७] भगवानदास स्रृ०, मथुरानिवासी, १५६० वि०;

[xa] भोज कवि स०, प्राचीन, १८७२ बि० |