RRs साहित्य का इतिहास-दर्शन
[८०७ ] 'शम्भुनाथसिश्र कवि २ स०, १८०३ वि०, रसकल्लोल, रसतरंगिणी, अलंक्रारदोपक; ग्रि०, असोथर, जिला फतहपुर के, १७५० ई० के आसपास उपस्थित; सत्कदिगिराविलार, यह असोथर, फतहपुर के भगवन्तराय खींची (मृत्यु १७६० ई०) के दरबार में F | रसकल्लोल, रसतरंगिणी और अलंकारदीपक के रचयिता | [८०८] Tera af 3 qo, बन्दीजन, १७६८ वि०, रामविलास ; पग्रि०, कवि और बंदीजन, १७५० ई० में उपस्थित। [८०६ ] शम्भुनाथ कवि ४ स०, त्रिपाठी, डोंड़ियावाले, १८०६ वि०, बेतालपचीसी, मुह॒त्तंचिन्तामणि-भाषा; ग्रि०, १७५२ ई० में उपस्थित; रागकल्पद्रुम, यह संभवतः रामविलास के रचयिता शंभुनाथ ही हैं; कि०, १७४५२ ई० (Ho १८०६ वि०) बैतालपचीसी ही का रचनाकाल्न है । [८१० ] शम्भुन/थर्,श्र कवि ५ Ho, FIM, Look Fao; fro, Aqara faae कवि--जैतवाड़ा के, जन्म १८४४ ई०, शिवपुराण की चतुर्य खंड का भाषानुवाद; कि०, १८४८ ई० (सं० १६०१ वि०) में छिव- पुराण चतुर्थ खंड का अनुवाद, इसी कारण यही इतका जन्मकाल भी नहीं हो सकता, यह उप- स्थिति-काल है । [८४११ ] शम्भुप्रसाद कवि fro, श्वृंगारी कवि । [८१२ ] शिवकवि स०, अरसेला, बंदीजन, दंउतहा, जिला गोंडा के निवासी, १७६६ वि०, रसिकविलास, अलंफारभूषण, पिंगल; ग्रि० स्व अरसेला कवि-देउतहाँ जिला गोंडा के भाट और कवि, १७७०,.ई० के आसपास उपस्थित, रसिकविलास नामक साहित्य-ग्रंथ के रचयिता, अलंकारभूषण और एक frye at frat; fro, gaa fare ar ara 'पिगल छन्दोबोध' है । [ ८१३] शिवकवि २ स०, बन्दीजन, विलग्रामी, १७६५ थि०, रसनिधि; पग्रि०, सिवकवि, बिलग्राम, जिला हरदोई के कवि और भाट, ज० १७३६ ई०, सुंदरीतिलक, रसनिधि । [ ८१४ ] शिवप्रसाद सितारेहिन्द स०, बनारसी; ग्रि०, राजा शिवप्रसाद, सी० एश_० आई०, बनारसवाले, जन्म' १८२३: ई०, १८८७ ई० में जीवित; वर्णमाला, बालबोब, विद्यांकुर, वामामनरंजन, हिंदी-व्याकरण, भूगोलहस्तामलक भाग १ एशिया, छोटा भूगो7स्तामलक, इतिहासतिमिरनाशक (तीनों भागों में), गुठका, मानवधर्भप्षार १, मानवधर्मंसार २, सेंडफर्ड और मर्टन की कहानी, सिक््खों का उदय