RRo साहित्य का इतिहास-दर्शन
[८२२] farafag स०, प्राचीन १७८८ वि०; ग्रि०, सिवसिद्ध, जन्म १७३१ fo; feo, frafag ar रचनाकाल सं० १५५०-७५ है, १७३१ ई० (सं० १७८८) के बाद, समवतः १८२५ के आसपास इनका जन्म हुआ होगा [5२३] fratag सेंगर स०, कांथा, जिला उन्नाव के निवासी, १८७८ वि०; ग्रि०, जन्म १८२१ go, ‘faafag- सरोज” के रचयिता, बृहच्छिवपुराण का भाषा और उर्दू दोनों में तथा ब्रह्मोत्तर खंड का केवल भाषा में अनुवाद किया था; कि०, “सरोज में इन्होंने अपने को स० १८७८ में उ०' लिखा है । यहू शृ८व७८ ई० सत् हे । इसी वर्ष इतका देहान्त भी हो गया था । यह ४५ वर्ष पूर्व १८३३ ई० में पैदा हुए थे । वृहच्छिवपुराण का भाषानुवाद इन्होंने नहीं किया था। अनुवाद करनेवाले Aare वाजपेयी थे, शिर्वाचह को सम्प-दक कहा जासकता है ।' [८रड ] शिवनाथ शुक्ल स०, मकरन्दपुरवाले देवकीनन्दन क्रवि के भाई, १८७० वि०; ग्रि०, सिवनाथ सुकल उप- नाम संभोगताथ, मकरंदपुर जिला कान्हपुर के, जन्म १८१३ ई०; कि०, 'शिवनाथ का उपताम ‘ara’ at, a fe autre’ | १८१३ ई०, (सं० १८७० थि०) न तो इनका जन्मकाल है और न इस संवत् तक इनके जीवित रहने की ही संभावना हैं। इसका रचनाकाल सं० १८४० वि० के पूर्व होना चाहिए, अतः ग्रियर्सन का समय भांत है ।” [5२५ ] शिवप्रकार्शासह स०, बाबू डुमराँव के, १९०१ वि०, रामतत्त्ववाधिती; प्रि०, सिवपरकाससिंह, इुमराँव: जिला शाहाबाद के बाबू, जन्म १८४४ ई०, तुलसोकइत विनयप््षिका की 'रामतत्त्वबोधिनी' नामक टीका के रचयिता | [८5२६] शिवदीन कवि स०, भिनगा, जिला बहरायचवालें, १६१५ वि०, क्ृष्णदत्तभूषण; ग्रि०, सिवदीन कवि-- भिनगा जिला बहराइच के, जन्म १८५८ ई०, ये भिनगा के राजा क्ृष्णदत्त सह के दरबारी कवि थे और उनके नाम पर एक ग्रंथ कृष्णदत्तभूषण” नामक लिखा था; कि०, १८४८ ई० (सं० १६१५ थि०) शिवदीन का उपस्थिति-काल, जन्मकाल नहीं, ये बिलग्र।मी थे, इनके लिखे क्ृष्ण- दत्तरासा' में, सं० १६०१ के एक युद्ध का वर्णन है । [ ८5२७] शिवप्रसन््त॒ कवि स० ब्राह्मग, शाकद्वीपी, रामनगर, जिला बाराबाँक़ीवाले; ग्रि०, १८८३ ईं० में जीवित । [ ss] शंकर कवि [5२६ ] are कवि २