३३९२ «साहित्य का इतिहास-वर्ानें
[58s] stat कवि ४ स०, राजपुतानेवाले, १६८० वि०, भवानी छल्द; ग्रि०, जन्म १६२३ ई०; कि०, सं० १४५७ में 'रणप्ल्ल छनन््द' को रचना को, सरोज और ग्रियर्सन दोनों के संवत् अशुद्ध, कवि दो सौ वष और पुराता ।
[ ८३६ ] wat ofa ao, fagat, जिला फर्रेपुर के ब्राह्मण, १८३४ वि०; ग्रि०, बिन्दकी, जिला फतहपुर क wat, TA You's Fo, WITTE; fro, १७७७ ई० अशुद्ध, रचनाकाल सं० १७६० वि० के आसपास । [ ८४०] aad कवि २ स०, ब्राह्मण, जाजमऊ, जिला कानपुर के, १८३४ वि०; ग्रि०, जाजमऊ, जिला उन्नाव के ब्राह्मण, जन्म १७७७ ई०; कि०, १७७७ ई० अशुद्ध, इनका रचनाकाल भी सं० १७६० वि०, दोनों सन््तन समकालीन । [८४१] सन््तबकस स०, बंदोजन, होलपुरवाले; प्रि०, होलपुर, जिला बाराबंकी के भाट, १८८३ ई० में जीवित। [ ८२ ] areata [ ८४३ ] सन्तदास कवि स॒०, निवरी, बिमलानन्दवाले, १६८० वि०; ग्रि०, ब्रजवासी, १६२३ ई० में उपस्थित; रागकल्पदुम, “इनके नाम पर दी हुई सारी कविताएँ सूरदास की कविताओं से दाब्दशः मेल खाती हें ।” [४४ ] सन््तकवि २ स०, प्राचीन, १७५६ वि०; प्रि०, जन्म १७०२ ई०, श्वृंगारी कवि; कि०, “संत ने रहीम की प्रशंसा की है, अतः यह सं० १६८३ वि० के आस-पास उपस्थित थे और १७०२ ई० अधिक- से-अधिक इनके जीवन का अंतिम सभय हो सकता है ।” [ s¥y] सुन्दर कवि स०, ब्राह्मण, ग्वालियर-निवासी, १६८८ वि०; ग्रि०, ग्वालियर के ब्राह्मण १६३१ ई० में उपस्थित, काव्यनिर्णय, सुंदरीत्तिलक, बादशाह शाहजहाँ के दरबार में थे । प्रमुख ग्रंथ सुन्दर- खुंगार सिहासनबत्तीसी ( रागकल्पद्रुम ) का ब्रजभाषा अनुवाद भी, ज्ञानसमुद्र नामक एक दार्णनिक ग्रंथ भी, गार्सा द तासी (भाग १, पृष्ठ ४८२) के अनुसार 'सुन्दरविद्या' नामक एक और ग्रंथ के भी रचयिता हो सकते हे; कि०, “सिंहासनवत्तीसी का वह ब्रजभाषानुवाद, जिसका