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पृष्ठ:साहित्य का इतिहास-दर्शन.djvu/२४५

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२३४ साहित्य का इतिहास-दर्शन

[sxx] शीतलरूराय स०, बन्दीजन, बौड़ी, जिला बहरायच, १८९४ वि०; ग्रि०, जन्म १८३७ ई०, यह एकौना जिला बहराइच के राजा गुमानसिंह जनवार के दरबार में थे ।

[८५६ ] सुलूतान पठान स०, नब्बाब सुलतान मोहम्मद खाँ, राजगढ़ भूपालवाले, १७६१ वि०, सतसई की टीका; प्रि०, जन्म १७०४ ई०, कवियों के आश्रग्नदाता, कविचंद ने इनके नाम पर बिहारी की सतसई पर कुंडलिया छंदों में एक टीका लिखी; कि०, १७०४ ई० उपस्थिति-काल है ।

[८५७ ] 4 सुल्तान कवि ग्रि०, श्रृंगारी कवि। [sks ] सहजराम स०, बनियाँ, पेंतेपुर, जिला सीतापुर, १८६१ वि०, रामायण सातों काण्ड, हनुमन्नाटक, रघुवंद्-भाषा; प्रि०, पेत्ेपुर जिला सीतापुर के बनिया, जन्म १८०४ ई०, इन्होंने एक रामायण लिखी है, जो रघुवंश और हतुमन्नाटक का अनुवाद है; कि०, सहजराम की रामायण का नाम रघुवंशदीपक है, रचनाकाल सं० १७८६ वि० है, अतः १८०४ ई० (सं० १८५६१ वि०) इनका जन्मकाल नहीं । [ ४५६ ] सहजराम २ स०, सनाका, बँवुवावाले, १६९०५ वि०, प्रहलाद-चरित्र; प्रि०, सहजराम सनाढच-बँधुआ के, जन्म १८४८ ई०, प्रहलाद-चरित्र के रचयिता; कि०, सहजराम बनिया से अभिन्न ।

[४६० ] इयासदास कवि स०, १७५४५ वि०; ग्रि०, जन्म १६९८ ई० |

[5६१] इयासमनोहर कवि fro, “ga कवि का भी अस्तित्व नहीं, सरोज में उद्धुत पद में 'श्याममनोहर' शब्द कृष्ण का सूचक है ।” [४६२] इ्यामशरण कवि Fo, १७५३ वि०, भाषा-स्वरोदय; fro, wT १६६६ ई०, स्वरोदय (रागकल्पद्रुम ) नामक ग्रंथ के रचयिता; कि०, “श्यामशरणजी चरणदास (सं० १७६०-१८३८ वि०) के शिष्य थे, इनका रचनाकाल Fo १८०० वि० के आसपास होता चाहिए, ग्रियसंन में दिया गया संवत्‌ अशुद्ध है, इनका जन्म सं० १७६० वि०' के पदचात्‌ होना जाहिए ।”