२३६ स०, १८०३ वि० । साहत्य का इतिहास दर्शन [ ८७२] सवितादत्त बाबू [ ८७३] साधर कवि सं०, १८५५ वि०; ग्रि०, जन्म १७६८ ई० । [ ८७४] संपति कवि ग्रि०, जन्म १८१३ ई० । [ ८७५] सिरताज कवि स०, बरसानेवाले. १८२५ वि०; ग्रि०, वरधाना के, जन्म १७६८ ई०; कि०, बरसाना के न कि वरधाना के । [ ८७६ ] सुमेर कवि । ८७७ | सुमेरसिंह साहबजादे ग्रि०, सुदरीतिलक म भी; कि०, "सुदन ने 'सुमेर' कवि का उल्लेख किया है, न कि सुमेर सिंह साहेबजादे का ( सुमेरसिंह साहबजादे भारतेन्दुयुगीन कवि है । इनकी रचना सुदरीतिलक में है । ये निजामाबाद, जिला आजमगढ़ के रहनेवाले थे और हरिऔधजी को काव्य और साहित्य की प्रेरणा देनेवाले थे ।" [ ८७८ ] सागर कवि " स०, ब्राह्मण, १८४३ वि०, बामामनरंजन; ग्रि०, जन्म १७८६ ई० 'बामामनरंजन' नामक शृंगारी ग्रंथ के रचयिता, कि०, "नवाब आसफुद्दौला का शासनकाल सं० १८३२ - ५४ वि० है । इन्हीं के मंत्री ठिकैतराय थे । यही समय सागर का भी हुआ । अतः १७८६ ई० (सं० १८४३ वि० ) इनका जन्मकाल नहीं है, उपस्थिति-काल है ।" [ ८७] सुखलाल कवि स०, १८५५ वि०; ग्रि०, १७४० ई० में उपस्थित, जुगलकिशोरभट्ट के दरबार में । [ ८५०] सुजान कवि ग्रि०, शृंगारी कवि; कि० घनानंद प्रिया सुजानराय, सं० १८०० के आसपास उपस्थित । [१] सबलसिह कवि स०. १७२७ वि०; ग्रि०, जन्म १६७०३०, महाभारत के २४००० श्लोकों का संक्षिप्त पद्यबद्ध अनुवाद, षट्ऋतु और भाषा ऋतुसंहार के रचयिता सबलसिंह कवि भी संभवतः ये ही;
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