२३८ साहित्य का इतिहास - वर्शन [ ८ ] सामन्त कवि स०, १७२८ वि०, ग्रि०, जन्म १६८१ ई०; ओरंगजेब ( १६५८ - १७०३ वि० ) के दरबार में थे; कि०, १६८१ ई० उपस्थिति-काल । [ ८० ] सेनकवि स०, नापित. बान्धवगढ़ के, १५६० वि० ग्रि०, बाधववाले, १४०० ई० के आसपास उपस्थित | [ ८६१] सीताराम दास स०, बनिया, बीरापुर, जिला बारबॉकी, ग्रि०, १८८३ ई० में जीवित । [MER] सुकवि कवि स०, १८५५ वि० ग्रि, जन्म १७९८ ० शृगारी कवि । [ ८६३ ] सगुणदास कवि कि०, वल्लभाचार्य के शिष्य, रचनाकाल म० १६००५० के आसपास | [ ८६४ | सुवंश शुक्ल स०, विगहपुर, जिला उन्नाववाले, १=३४ वि०, अमरकोश, रसतरंगिणी, रसमंजरी, विद्वन्मोदतरङ्गिणी; ग्रि०, विगहपुर, जिला उन्नाव के जन्म १७७७ ई० । कि०, "सुवंश शुक्ल का रचनाकाल सं० १८६१-८४ है १७७७ ई० (स० १८३४ वि०) इनका जन्मकाल हो सकता हूँ । रसतर गिणी का रचनाकाल सं० १८६१ त्रि०. अमरकोश का सं० १८६२ वि० और रसमंजरी का सं० १८६५ वि० है । अमंटी सुलतानपुर जिले में है, न कि फर्रुखाबाद जिले में । साथ ही उमराव सिंह अमेठी के नहीं थे, यह विसवाँ जिला सीतापुर के कायस्थ थे ।" [ ८६५] सरदार कवि स०, बन्दोजन, बनारती, साहित्यमरसी, हनुमत्भूषण, तुलसीभूषण, मानसभूषण, कवि- fया को तिलक, रसिकप्रिया को तिलक, सतसई को तिलक शृंगारसग्रह, सूरदास के तीन सौ अस्सी कूटो का संग्रह; ग्रि०, १५८३ ई० में जीवित कि०, १८८३ ई० (सं० १९४० वि० ) सरदार का मृत्युकाल । [ ८६६ ] सूरदास स०, ब्राह्मण, व्रजवासी, बाबा रामदास के पुत्र, वल्लभाचार्य के शिष्य. १६४० वि०; ग्रि०, व्रजवासी भाट, १५५० ई० में उपस्थित, परम्परा के अनुसार संवत् १५४० वि० ( १४८३ ई० ) में उत्पन्न ; कि०, "सूरदास न तो अकबर दरबार के गवैये थे और न अकबरी दरबार के गायक रामदास इनके पिता ही थे ।”
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