अध्याय १३ [ ६७ ] सूदन कवि २३६ स०, १८९० ५० ०, जन्म १७५३ ई० कि०, "सूदन ने सुजनचरित की रचना सं० १८१० वि० के आसपास की थी, अतः यही इनका जन्मकाल नहीं है ।" [ ६८ ] सेनापति कवि स०, वृन्दावन -निवासी, “ १६२३ ई० (सं० १६८० ) १६८० वि०, काव्य- कल्पद्रुम ग्रि०, जन्म १६२३ ई०; कि०, सेनापति का उपस्थिति-काल है, न कि उत्पत्ति-काल । इनके उपलब्ध ग्रंथ का नाम 'कवित्त रत्नाकर' है । संभवतः काव्यकल्पद्रुम भी इसी का एक अन्य नाम है। इसकी रचना सं० १७०६ में हुई थी।" [see] सूरति मिश्र स०, आगरेवाले, १७६६ वि०, सतसई की टीका, सरस रस, नखशिख, रसिकप्रिया का तिलक अलंकारमाला; ग्रि०, १७२० ई० में उपस्थित कि०, सूरति मिश्र का रचनाकाल सं० १७६६-१८०० वि० । [800] शारंगधर कवि सo, बंदीजन चन्द्रकवीश्वरवंशी, १३३० वि०, हम्मीररायसा, हम्मीरकाव्य; ग्रि०, रण- थंभौर निवासी, १३६३ ई० में उपस्थित, कि०, "बीसलदेव चंद के पूर्वज नहीं थे, बीसलदेव के दरबारी कवि चंद के पूर्वज थे, सारंगधर चंद के वंशज थे, इसका कोई प्रमाण सुलभ नहीं, सारंगधर के पिता का नाम दामोदर और पितामह का राघवदेव (रघुनाथ नहीं, जैसा कि ग्रियर्सन में कहा गया है) था, जो हम्मीर के दरबारी थे ।" [६०१] सदाशिव कवि सं०, बंदीजन १७३४ वि०, राजरत्नगढ़ ग्रि०, चारण और कवि १६६० ई० में उपस्थित । [202] शिवकवि स०, प्राचीन, १६३१ वि० ग्रिं०, जन्म १५७४ ई० हजारा; सुन्दरीतिलक; किं०, " इनको सं० १७५० वि० के पूर्व उपस्थित माना जा सकता है । इससे अधिक इनके विषय में कुछ नहीं कहा जा सकता । " [ ६०३ ] सुखलाल कवि स०, १८०३ वि०; ग्रि०, १७४० ई० में उपस्थित । [ ६०४ ] सन्तजीव कवि स०, १८०३ वि० प्रि०, १७४० ई० में उपस्थित । 1
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