अध्याय १३ [१४] शिवदत्त २४१ स०, ब्राह्मण, काशीस्थ, १९११ वि०; ग्रि०, जन्म १८५४ ई०, शृंगार-संग्रह, संभवत: वह भी, जिनका उल्लेख शिवसिंह ने विना विवरण दिये 'शिवदत्त कवि' नाम से किया है; कि०, "१८५४ ई० (सं० १९९१ वि० ) इनका जन्मकाल न होकर, उपस्थिति - काल है । इन्होंने सं० १९२६ ई० में उत्पलारण्य - माहात्म्य और १९२३ में ज्ञानप्राप्ति- बारहमासी की रचना की थी।" ग्रि०, १६२५ ई० के पहले उपस्थित । [ ६१५] श्रीकर कवि [ १६ ] सनेही कवि ग्रि०, कवि सूदन द्वारा उल्लिखित, अतः १७५३ ई० के पूर्व उपस्थित । [१७] सूरज कवि ग्रि०, कवि सूदन द्वारा उल्लिखित, अतः १७५३ ई० के पूर्व उपस्थित | [225] सुखानन्द कवि स०, बन्दीजन, चचेड़ीवाले, १८०३ वि०; ग्रि०, चचेरी के कवि और भाट, जन्म १७४६ ई० । [१] सर्वसुख लाल स०, १७६१ वि० नि० जन्म १७३४ ई०; सूदन । , [२०] श्रीलाल स०, गुजराती, भांडेर, राजपूतानेवाले, १८५० वि०, भाषा-चंद्रोदय; ग्रि०, जन्म १७६३ ई०, भाषा - चंद्रोदय और अन्य ग्रंथों के रचयिता । [ ε२१] शंभुनाथ मिश्र स०, गंजमुरादाबादवाले; ग्रि०, संभुनाथ मिसर, मुरादाबाद जिला उन्नाव के; कि०, " सरोज में इन्हें गंजमुरादाबादवाले कहा गया है । विनोद (११९७ ) के अनुसार इनका रचना- काल सं० १८६७ है | [२२] समसिह स०, क्षत्री, हड़हा, जिला बाराबंकी; प्रि०, १८८३ ई० में जीवित, एक रामायण के रचयिता ।
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