सामग्री पर जाएँ

पृष्ठ:साहित्य का इतिहास-दर्शन.djvu/२५६

विकिस्रोत से
यह पृष्ठ अभी शोधित नहीं है।

अध्याय १३ [eve] हेमगोपाल कवि स०, १८८० वि०, ग्रि०, एक कूट छन्द के रचयिता । [ ६५० ] हेमनाथ कवि २४५ स०, केहरो कल्यान सिंह के यहाँ ग्रि०, केहरी के कल्यान सिंह के दरबारी कवि थे; कि०, "केहरी स्थान का सूचक नहीं है। हेमनाथ सं० १८७५० पूर्व किसी समय वर्तमान थे ।” [ ६५१ ] हेमकवि त्रि०, शृंगार-संग्रह में भी, शृंगारी कवि । [६५२] हरिश्चन्द्र बाबू स०, बनारसी, गोपालचन्द्र शाह के पुत्र ; ग्रि०, बाबू हरिश्चन्द्र बनारसी, जन्म 8 सितंबर, १८५० ई० । [ ५३ ] हरजीवन कवि कि०, “१९३८ वि० के आसपास उपस्थित गुजराती कवि ! " [ ५४ ] हरिजन कवि स०, १६६० वि०; ग्रि०, जन्म १६३३ ई० । [ ५५ ] हरजू कवि स०, १७०५ वि०; ग्रि०, जन्म १६४८ ई० । [ ५६ ] हीरामणि कवि स०, १६८० वि०; ग्रि०, जन्म १६२३ ई०; कि०, १६२३ ई०, उपस्थिति-काल है । [ ५७ ] हरदेव कवि स०, १८३० वि०; ग्रि०, १८०० ई०, रघुनाथराव ( १८१६ - १८१८ ) के दरबारी कवि थे । [ ५८ ] हरिलाल कवि [ ५६ ] हीराराम स०, प्राचीन, १६८० वि०, नखशिय; ग्रि०, संभवतः पिंगल के भी रचयिता । [ ६६० ] हिमाचलराम कवि स०, ब्राह्मण, भदौली, जिला फैजाबादू, ग्रि०, १८४७ ई० ; किं०, १९१५ वि० में मृत्यु |