२४६ साहित्य का इतिहास-दर्शन [ ६६१] हीरालाल कवि कि० मं० १८३० में राधा शतक नामक ग्रंथ रचा । कि०, अस्तित्वहीन कवि । . [ ६६२ ] हुलास कवि [ ६६३ ] हरचरणदास कवि स०, बृतकविवल्लभ; ग्रि०, वृहत्कविवल्लभ नामक भाषा साहित्य के एक ग्रंथ के रचयिता; कि०, बृहत्कविवल्लभ का रचनाकाल सं० १५३९ वि० । [ ६४ ] हरिचन्द कवि स, बरसानेवाले, छन्दस्वरूपिणी; पिगल-ग्रंथ के रचयिता । ग्रि०, ब्रज के अंतर्गत बरसाना के निवासी, छंद-स्वरूपिणी [ ६६५ ] हजारीलाल तिरवेदी स०, अलीगंज, जिला खीरी; ग्रि०, १८८३ ई० में जीवित नीति और शांत रस के कवि । [ ६६६ ] हरिनाथ स०, ब्राह्मण, काशीनिवासी १८२६ वि०, अलंकारदर्पण | [ ६६७ ] हिम्मतबहादुर नवाब , स०, १७६५ वि०; ग्रि०, गोसाई, नवाब हिम्मतबहादुर, १५०० ई० में उपस्थित; सन्- कविगिराविलास, इनके दरबार में अनेक कवि, जिनमें ठाकुर और रामसरन भी कि०, हिम्मत- बहादुर की मृत्यु सं० १८६१ वि० में । [ ६६८ ] हितराम कवि कि०, "हितराम ने सं० १७२२ वि० में सिद्धांतसमुद्र या श्रीकृष्ण श्रुतिविरदावली की रचना की थी ।" [६] हरिजन कवि स०, ललितपुर निवासी, १९११ वि०, रसिकप्रिया टीका; ग्रि०, जन्म ( ? उपस्थिति ) १८५१ ई०, रसिकप्रिया की टीका बनारस के महाराज ईश्वरीनारायणसिंह के नाम पर की । ये कवि सरदार के पिता थे; कि०, “ १८५९ ई० (सं० १९०८) इनका उपस्थिति-काल है; क्योंकि इसके तीन वर्ष पूर्व सं० १६०५ में इनके पुत्र सरदार ने शृंगार-संग्रह नामक काव्य-संग्रह संकलित किया था । रसिकप्रिया की टीका सरदार की बनाई हुई है, न कि इनके बाप हरिजन की । सरोज़ में यह उल्लेख प्रमाद से ही हो गया है ।"
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