पृष्ठ:सिद्धांत और अध्ययन.djvu/१०६

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६८ सिद्धान्त और अध्ययन वास्तविक प्रत्यक्ष होता है और आधा काल्पनिक । हम वृक्षा का एक पहलू : देखते हैं और दूसरे की सत्ता कल्पना में सही मान लेने है। हम वस्तु को देख- कर उसके चिकनापन और खुरदरापन का अनुमान कर लेते हैं। इसको न्याय- शास्त्र में ज्ञान-लक्षण से उत्पन्न अलौकिक प्रत्यक्ष कहा है। बच्चों के खेल में भी कल्पना का बहुत काम पड़ता है। लकड़ी का घोड़ा बनाकर 'चल रे घोड़े, चल रे घोड़े सरपट चाल' कहना कल्पना ही का काम है । चित्रों के टुकड़े . अलग-अलग जुटाकर उनका साबित चित्र बनाना कल्पना ही का खेल है। कवि . भी कल्पना से काम लेता है। उसी के आधार पर वह प्रजापति कहलाता है । कल्पना का कार्य अनुभूति और अभिव्यक्ति दोनों ही में है। अलङ्कार, लक्षणा, व्यञ्जना सब कल्पना के रूप हैं। हमारे स्वप्न भी जैसा ऊपर कहा जा चुका है कल्पना के उपादानों से ही बनते हैं। आविष्कारक का भी कल्पना का आश्रय लिए बिना काम नहीं बनता । पागल की कल्पना अनियन्त्रित रूप धारणकर कभी-कभी उसको ऐसा भान करा देती है कि वह ईसामसीह है या काँच का बना हुआ है अथवा वह मनुष्य नहीं है, बकरा है। भिन्न-भिन्न मनुष्यों में भिन्न-भिन्न प्रकार के कल्पना के चित्रों का प्राधान्य होता है और कभी-कभी ये काल्पनिक चित्र क्रिया का भी सञ्चालन करा देते है किन्हीं-किन्हीं पुरुषों में चाक्षुष-चित्रों का प्राधान्य होता है, किन्हीं में शब्द-चिश्नों का और किन्हीं में गन्ध-चित्रों का तथा किन्हीं में स्पर्श-चित्रों वा निया-चित्रों का । किसी शब्द का वर्णविन्यास याद करते हुए बहुत-से लोग कल्पना में हाथ चलाना प्रारम्भ कर देते हैं। बहुत-से लोग मानसिक गणित' करने में अंगुलियों का सञ्चालन करने लगते हैं। ____ कवि की प्रतिभा (Genius) भी तो एक असाधारण प्रकार की कल्पना है । वह सङ्कल्पित और अराङ्कल्पित कल्पना के बीच की चीज है। उसमें थोड़े ___ परिश्रम से अधिक फल की प्राप्ति होती है। उसमें अपने- प्रतिभा आप नई-नई स्फूति होती रहती है। अपने यहाँ प्रतिभा को दो प्रकार का माना है, कारयित्री जो कि कवि और रचयिता में होती है और भावयित्री जो कि भावक, मालोचक वा सहृदय पाठक में होती है । स्वप्न में बुद्धि का नियन्त्रण नहीं रहता, प्रतिभा में नियन्त्रण रहता है। स्वप्न में भी नवीनता का अभाव नहीं किन्तु प्रतिभा में नवीनता की भावना कुछ अधिक रहती है। यह विषयान्तर भूमिकारूप से आवश्वयक था, पाठवा-गण इसे क्षमा करेंगे।