पृष्ठ:सिद्धांत और अध्ययन.djvu/११७

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काव्य के क्षेत्र-कवि का सत्य . वना के क्षेत्र के बाहर नहीं जाता है, उसके बणित विषय के लिए यह आव- श्यक नहीं कि वह वास्तविक संसार में घटित हुआ हो किन्तु वह असम्भव न हो। 'होरी' नाम का किसान किसी गाँव-विशेष में रहता हो या न रहता हो किन्तु उसने जो कुछ किया वहीं किया जो साधारणतया उसकी जाति के लोग करते हैं। कहा भी है-'असम्भाव्यं न वक्तव्य प्रत्यक्षमपि दृश्यते'-वह इतिहासों के नामों और तिथियों को महत्त्व न देता हुअा भी पूर्वापर कम से बँधा रहता है। वह अकबर को औरङ्गजेब का बेटा नहीं बना सकता। वाता. वरण का भी उसे ध्यान रखना ही पड़ता है। हाँ ब्युरे ( Detail) की बातों में वह भावोद्घाटन की आवश्यकताओं के अनुकूल मनचाहा उलट-फेर कर लेता है। मनुष्य में सङ्कल्प की स्वतन्त्रता में विश्वास करता हुआ वह उसके कार्यक्रम में भी उलट-फेर कर लेता है । एक स्थिति में कई मार्ग खुले रहते हैं। कवि को इस बात की स्वतन्त्रता रहती है कि उनमें से वह किसी को अपनावे, किन्तु प्रकृति के क्षेत्र में वह इतना स्वतन्त्र नहीं है कि वह धनियाँ और धान, सरसों और ज्वार को एक साथ खड़ा करदे ( जैसे- 'चो धानों की सब्जी, वो सरसों का रूप') अथवा केशर को चाहे जहाँ उगा दे (जैसा केशव ने किया है.---'केशरी ज्यों कंपत है।')। जिन बातों में कवि लोगों का समझौता रहता है (जिन्हें पारिभाषिक भाषा में कवि-समय और अंग्रेजी में 'Poetic Convention' कहते हैं) उनके प्रयोग में उसे सत्य की परवाह नहीं रहती है, जैसे--चकई-चकवा रात को अलग-अलग रहते हैं, अथवा कमल नदी में होते हैं (वास्तव में कमल तालाब में होते हैं). अशोक का वृक्ष किसी सुन्दर स्त्री के पदाघात से फूल उठता है-ऐसी ही कवि- प्रसिद्धियाँ कवि-समय कहलाती हैं। जो सबके लिए सम हो समय कहलाता है! समय शब्द का प्रयोग अाजकल के 'Agreement' शब्द के अर्थ में होता है-- श्रीरामचन्द्र सुग्रीव से कहते हैं कि अपने समय (वायदे) पर दृढ़ बने रहो, बालि के रास्ते के अनुगामी मत बनो-'समये तिष्ठ सुग्रीव मा बालिपथमन्वगाः।' कवि अपनी रुचि के अनुकूल चित्र के व्युरे (Detail) को उभार में लाने के लिए वास्तविक संसार में काट-छाँट करता है और कूड़े-कर्कट को साफ कर असली स्वर्ण को सामने लाता है। वह अदालती गवाह की भांति सत्य, पूर्ण सत्य और सत्य के अतिरिक्त कुछ नहीं कहने की विडम्बना नहीं करता। जिस दृष्टि- कोण से सत्यदेव की सुन्दर-से-सुन्दर और स्पष्ट-से-स्पष्ट झाँकी मिल सकती है उसी पर वह पाठक को लाकर खड़ा कर देता है। इसीलिए वह सत्य के सुन्दरतम् रूप दिखाने के लिए थोड़ा मायाजाल रचे या चमत्कार के साधनों का प्रयोग