पृष्ठ:सिद्धांत और अध्ययन.djvu/१७६

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सिद्धान्त और अध्ययन भवभूति ने कहा है-'एको रसः करुण एव' (उत्तररामचरित, ३।४७)। दूसरे के अनुभव को अपना बनाने में अपनी प्रात्मा का विस्तार होता है, यही सुख का कारण बन जाता है.-'भूमा वै सुखम'-~-अपने गोत्र को बढ़ते हुए देखकर किसको सुख नहीं होता? अब प्रश्न यह होता है कि रस मनोवेग नहीं तो है क्या वस्तु ? किसी वस्तु का प्रास्वादन करने पर जो आनन्द मिलता है उसे रस कहते हैं। साधारण __ भाषा में कहते हैं कि अमुक की कथा में 'बड़ा रस रस का स्वरूप प्राया', 'कानों में रस पड़ रहा है', 'वे बड़े रसिक हैं। रसिया शब्द का अर्थ है--जिसके प्रास्वादन में आनन्द प्रावे । आनन्द लेने वाले को भी रसिया कहते हैं, जैसे 'हनुमान चालीसा में 'राम-कथा सुनिबे कौं रसिया' । संक्षेप में प्रास्वादनजन्य आनन्द को रस कहते हैं- 'रस्यते (श्रास्वायते) इति रसः' (साहित्यदर्पण, ५।३ की वृत्ति) । दशरूपककार धनञ्जय ने भी रस को स्वादरूप कहा है । बह रसिक में भी रहता है-'रसः स एव स्वादित्वादसिकस्यैव वर्तनात्' (दशरूपक, ४।३८)। अब जरा शास्त्रीय परिभाषा भी लीजिए :- - 'विभावेनानुभावेन व्यक्तः सन्चारिणा तथा । रसतामेति रस्यादिः स्थायिभावः सचेतसाम् ॥' -साहित्यदर्पण (३।१) विभाव (श्रालम्बन----स्थायी भाव को जाग्रत करने के मुख्य कारण, शृङ्गार के सम्बन्ध में नायक-नायिका, रौद्र के सम्बन्ध में शत्रु), उद्दीपन (अर्थात् सहायक कारण जो उस भाव को उद्दीप्त रक्खें-जैसे शृङ्गार में चाँदनी, गीत- वाद्य और पालम्बन की चेष्टाएँ), अनुभाव (भावों के बाह्य व्यञ्जक----जैसे शृङ्गार में कम्प, स्वेद, रोमाञ्च तथा रौद्र में मुंह लाल हो जाना-~ये कार्यरूप होते हैं) तथा सञ्चारी (स्थायी भावों को पुष्ट करने वाले, उनके साथ रहने वाले भाव-~~-जैसे शृङ्गार में हर्ष, दैन्य, चिन्ता तथा करुण में दैन्य) भावों से व्यक्त होकर स्थायी भाव सहृदयों के हृदय में रस को प्राप्त होता है। व्यक्त का अर्थ है दूध का दही हो जाने के सदृश परिणत हो जाना-'व्यक्तो दध्यादिन्यायेन परिणता' (साहित्यदर्पण, ३.१ की वृत्ति)। विभावादि कारण, अनुभावादि कार्य और सञ्चारी आदि सहकारी सभी रस की निष्पत्ति में कारण होते हैं । यह एक प्रकार का सामूहिक प्रभाव है जो सहृदय लोगों पर, जिनके हृदय में स्थायी भावों के प्राक्तन या आधुनिक संस्कार मौजूद हैं, पड़ता है। सहृदय' पर जोर देकर हमारे प्राचार्यों ने मन की सक्रियता और ग्राहकता को स्वीकार किया है।