पृष्ठ:सिद्धांत और अध्ययन.djvu/१८०

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ शोधित नही है


१४४ सिद्वान्त और अध्ययनः . ___(4) Bodily expresson-(a) internal organic sensa. tions, (b) Muscular movements. (5) Different modifications of the emotions (if any) at different stages of mental development. .: :.:. -Elements of Psychology (Page 226) .. । । ।। अर्थात् .:. :: .. . . १. उसके विषय का वर्णन-जो परिस्थिति कि देखी गई हो, कल्पित. की गई हो या स्मरण की गई हो। .. २. उसका भावमूलक गुण अर्थात् वह सुखद है, दुःखद है अथवा उदासीन- प्रायः । भाव का विस्तार और उसकी गहराई । .. ३. संकल्प-शक्ति को प्रभावित करने का प्रकार, उससे संलग्न क्रियात्मक प्रवृत्तियाँ । . .... ४. शारीरिक अभिव्यञ्जक-~-(क) आन्तरिक अवयव-सम्बन्धिनी संवेद- नाएँ, (ख) पेशियों की क्रियाएँ। ... ५. भिन्न-भिन्न विकास की अवस्थाओं में मानसिक विकास के भिन्न- भिन्न धरातलों पर मनोवेगों के विविध रूप (यदि कोई हों)। ..... ____ अब हमको देखना चाहिए कि हमारे रस-शास्त्र के प्राचार्यों ने भिन्न-भिन्न रसों का जो वर्णन किया है, वह इसी प्रकार है या. और किसी प्रकार ? हम एक-एक कलम (बात) को लेकर विवेचनात्मक दृष्टि से देखेंगे कि. रस-शास्त्र का भवन तैयार करने में भरतमुनि को कितनी मनोवैज्ञानिक आधार-भूमि तैयार करनी पड़ी होगी। । . १. विषय का वर्णन :- यह हमारे रस-शास्त्रों में विभावों द्वारा होता है । ये रति आदि स्थायी भावों के कारण माने गये हैं, ये दो प्रकार के होते है-पालम्बन और उद्दीपन । पालम्बन वे हैं जो स्थायी भाव की उत्पत्ति में मुख्य कारण होते हैं, उन्हीं पर स्थायी भाव नवलम्बित होता है; उद्दीपन वे हैं जो गौण कारण होते हैं, वे रस को.उद्दीप्त करते रहते हैं। पालम्बन और उद्दीपन ही उस परिस्थिति को बनाते हैं जिसके कारण कि स्थायी भाव की उत्पत्ति होती है । शेर भय का आलम्बन है- उसका पालम्बनत्व तभी तक है जब तक कि वह भय की उपयुक्त परिस्थिति में दिखाई पड़ता है, अर्थात् जब वह बीहड़ बन की निर्जन निस्तब्धता में गरज कर चारों शोर की पहाड़ियों को प्रतिध्वनित कर रहा हो और कराल डाढ़ों को व्यक्त करता हुश्ना पंजा उठाये प्राग्रामण के लिए उद्यत हो, तभी वह हमारे भय का पालम्बन बनेगा। पिंजड़े में बन्द शेर