पृष्ठ:सिद्धांत और अध्ययन.djvu/२१९

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साधारणीकरण-उपयोगिता व्यापक बनाना चाहता है। व्यापक बनने में ही उसके स्थायित्व की आशा रहती है। इसी के साथ हमारी प्रात्मरक्षा का भी व्यावहारिक प्रश्न लगा रहता है । हम मनुष्य-जाति के अनुभव से लाभ उठाकर संसार में अपना काम चलाते हैं । विज्ञान के नियम भी अनुभव में साधारणीकरण का ही रूप हैं। तर्कशास्त्र की व्यापि भी साधारणीकरण का ही दूसरा नाम है। मेरे कहने का यह अभिप्राय है कि जो प्रवृत्ति विज्ञान के नियम-निर्माण और तर्कशास्त्र के कवि-ग्रहण में है वही साधारणीकरण में है । मनुष्य भेद और अनेकता से संतुष्ट नहीं होता, वह एकता चाहता है। एकता मन की एक प्रारम्भिक माँग है जिसका परिचय हमको सभी क्षेत्रों में मिलता है। .: साधारणीकरण की उपयोगिता काव्यानुशीलन की उपयोगिता है । उसके द्वारा हमारी सहानुभूति विस्तृत हो जाती है । हम दूसरे के साथ भावतादात्म्य करना सीखते हैं । हमारे भावों का परिष्कार ___ उपयोगिता होकर उनका पारस्परिक सामञ्जस्य भी होने लगता है । श्रृङ्गार, जो लौकिक अनुभव में विषयानन्द का रूप धारण कर लेता है; काव्य में परिष्कृत हो आत्मानन्द के निकट पहुँच जाता है । काव्यानुशीलन करने वाले की रति भी सात्विकोन्मुखी हो जाती है। काव्य के अनुशीलन से व्यक्ति ऊँचा उठ जाता है और उसके जीवन में सन्तुलन प्राजाता है।