पृष्ठ:सिद्धांत और अध्ययन.djvu/२२२

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सिद्वान्त और अध्ययन बाद जब वह शङ्का मेरे मन से अोझल होगई तब मेरे भीतर का बालाकार जाग उठा और मैं उस समय भूल गया कि मेरा सर्वस्व (मेरी सारी उम्र की कमाई मकान में ही लगी थी ) नाश होने की सम्भावना है। मैं नाना प्रकार की कल्पनागों में मग्न होगया । मैं नारायण ( 'नाराः (जल) अयनं यस्य' ) और कामायनी के मनु से अपनी तुलना करने लगा। काव्य का अनुभव कल्पना का मधुमय सञ्जीवनरस लेकर पीछे से प्राता है। वर्ड स्वर्थ (Wordsworth) ने कहा है-'Poetry is the spontane- ous overflow of emotions recollected in tranquilty.'- अर्थात् काव्य शान्ति के समय स्मरण किये हुए मनोवेग का प्रात्मप्रेरित प्रवाह है । प्राय: अधिकांश लोगों का कलाकार का व्यक्तित्व उनके निजी व्यक्तित्व के पीछे रहता है किन्तु कुछ लोगों में कलाकार का व्यक्तित्व निजी व्यक्तित्व को दवाये रखता है । सत्यनारायणजी वर्षा-वारि-बिन्दुओं द्वारा धोये-धोये पातों की कमनीय सुषमा से प्रभावित होकर कविता करने में इतने मग्न होगये थे कि परीक्षा-भवन में समय पर पहुँचने की उनको चिन्ता ही न रही। ____कवि जब अपने लौकिक अनुभव का सीधा परिप्रेषण नहीं करता है तब तो उसमें कल्पना का मधु मिल ही जाता है तथा वह दुःखद अनुभव सुखद हो जाता है और वह सीधा परिप्रेषण तभी करता है जबकि उसके कलाकार का व्यक्तित्व, जो परिस्थिति के क्षुद्र बन्धनों से मुक्त होता है, उसके लौकिक व्यक्तित्व को दबा लेता है। वाल्मीकिजी का शोक श्लोक में इसलिए परिणत होगया कि उनके उस शोक में कलाकार की सहानुभूति और लोकानुकम्पा का पुट था । वह वैयक्तिक न था वरन् लोकसामान्य भाव-भूमि से ऊँचे उठे हुए साधारणीकृत व्यक्ति के हृदय का उद्गार था, इसीलिए वह काव्य के रस- रूप में प्रवाहित हो सका। कवि जितना बड़ा होता है उतना ही उसका कलाकार उसके लौकिक व्यक्तित्व को आविर्भूत रखता है। वाल्मीकि में उस समय दोनों व्यक्तित्व मिल गये थे। .. कवि जब अपनी वैयक्तिक हानि का वर्णन करता है तब उसमें भी उसके कलाकार का व्यक्तित्व मिला रहता है । कविवर टेनीसन का 'इन मेमोरियम' नाम का शोक-काव्य जिसको उसने अपने मित्र की मृत्यु पर लिखा था, इसका अच्छा उदाहरण है। उसके व्यक्तिगत शोक ने कलाकार को बल अवश्य दिया किन्तु उसके रोने में और साधारण मनुष्य के रोने में अन्तर था। उसका व्यक्तिगत शोक मित्रता के सम्बन्धों पीर मृत्युजन्य शोक की साधारण भावना प्रकट करने का एक अवसर बन गया था। कवि की आह व्यक्ति की प्राह