पृष्ठ:सिद्धांत और अध्ययन.djvu/२४५

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काव्य का कलापक्ष-वृत्तियों और रीतियों का विभाजन २०६ रखने में सहायक होती थी। गद्य में अधिक तुकबन्दी दोष ही हो जाती है । गद्य में गति और लय होती है किन्तु वह पद्य की भाँति पूर्णतया व्यक्त नहीं होती है। रोतियों का विचार भामह, दण्डी और कुन्तल ने मार्गरूप से किया । दण्डी के मत से वैदर्भी सब गुणों से सम्पन्न मानी गई है और गौडीय में इसके अधिकांश गुणों का वैपरीत्य बतलाया गया है । वामन ने पत्तियों और गौडीय को प्रोज-प्रधान एक विशिष्ट शैली माना है । रीतियों का वामन ने इन मार्गों को रीति कहा है। उन्होंने शैली की विभाजन परिभाषा इस प्रकार की है.. 'विशिष्टा पदरचना रीतिः' ( काव्यालङ्कारसूत्र, १।२।७ )--और विशेष का अर्थ बतलाया है, गुणसम्पन्न--'विशेषोगुणात्मा' । वामन ने पाञ्चाली एक तीसरी रोति मानी। प्रारम्भ में इन रीतियों का देश-विशेष से सम्बन्ध रहा। जिस प्रान्त के लोगों ने जिस प्रकार की शैली में विशिष्टता प्राप्त की थी उस प्रकार की शैली उस देश के नाम पर अभिहित हुई । वैदर्भी का विदर्भ देश ( बरार) से, गौडोय का बङ्गाल से, पाञ्चाली का पाञ्चाल से अर्थात् पजाब से और लाटीया का लाट देश ( गुजरात ) से सम्बन्ध था। योरोप में भी यूनानी सभ्यता से प्रभावित तीन भू-भागों के आधार पर 'क्विन्टीलियन' (Quintelian ) ने तीन रीतियाँ मानी हैं-(१) एटिक (Attic), (२) एसिएटिक ( Asiatic), (३) रोडियन ( Rhodian )। एटिक का सम्बन्ध यूनान की राजधानी एथेन्स से था, यह वैदर्भी के समान थी; एसिएटिक का सम्बन्ध एशिया में स्थित यूनानी उपनिवेश से था, वह गौडीय के समान शब्द-बाहुल्यपूर्ण किन्तु निस्सार थी और रोडियन का सम्बन्ध 'रोड्स' (Rhodes) से है, इसमें दोनों का मिश्रण था । कुन्तल के मार्गों और मम्मट की वृत्तियों में यह देश का सम्बन्ध छूट गया । ___यद्यपि भामह के मत से जिसको हमने पृष्ठ २०४ पर उद्धृत किया है रीतियों और वृत्तियों का विभाजन करना और उनको भिन्न-भिन्न नाम देना बुद्धिहीनों का ( 'अमेवसाम्' ) काम है तथापि रीतियों का शैली से विशेष । सम्बन्ध होने के कारण उनका जान लेना आवश्यक है, उनमें बहुत-कुछ सार है । गुणों के द्वारा रीतियों और वृत्तियों का रस से सम्बन्ध है । वे रस को उपक: मानी गई हैं। रस के अनुकूल ही उनका वर्ण-विन्यास रक्खा गया है। माधुर्यगुणव्यजक वर्णों और पदों से सम्बन्ध रखनेवाली वृत्ति को 'उपनागरिका' कहते हैं और प्रोजगुण के अभिव्यञ्जक वों और