पृष्ठ:सिद्धांत और अध्ययन.djvu/२६२

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२२६ सिद्धान्त और अध्ययन देश : 'जीवन' के अर्थ जल और जिन्दगी दोनों ही होते हैं किन्तु 'मरु में जीवन दूर है' कहने से जीवन का अर्थ पानी ही होगा। काल : 'चित्रभानु' के अर्थ सूर्य और अग्नि दोनों ही होते हैं किन्तु जब यह कहा जाय कि 'रात में चित्रभान शोभा देता है तब इसका अर्थ अग्नि ही होगा। इसी प्रकार लिङ्ग स्वरादि से भी अर्थ निश्चित किया जाता है। लक्षणामूला शाब्दी व्यञ्जना के उतने ही रूप होंगे जितने कि लक्षणा के। श्रा व्यन्जना :-शब्द का अर्थ लगाना (विशेषकर व्यङ्गयार्थ) नाई बातों पर निर्भर रहता है । उन्हीं बातों को जैसे वक्ता, श्रोता, प्रसङ्ग, देश, काल आदि को व्यञ्जना के विभाजन का अाधार बनाया गया है । यदि कोई कायदे- कानून की पाबन्दीवाला प्रोफेसर लड़के से पूछे कि 'तुम्हारा कोट कहाँ है' तो उसकी यही व्यञ्जना होगी कि वह उसके कोट न पहनने पर आपत्ति करता है। यदि धोबी पूछता है तो उसकी यह व्यञ्जना होगी कि क्या मैं उसे धोने के लिए ले जा सकता हूँ ? इस तरह की व्यञ्जना को पारिभाषिक भाषा में वस्तृवैशिष्ट्योत्पन्न वाच्यसम्भवा कहेंगे। ऐसे ही लक्षणा और व्यञ्जना के ऊपर वक्ता की विशिष्टता के कारण व्यञ्जना चलती है उन्हें नामश: वक्त वैशिष्टयोत्पन्न' लक्ष्यसम्भवा और वयतृवैशिष्टयोत्पन्न व्यङ्गघसम्भबा कहेंगे । हाँ पर व्यङ्गयार्थ सुनने वाले की विशेषता पर निर्भर हो वहाँ पर बोद्धव्य- वशिष्टयवाच्य, लक्ष्य और व्यङ्गयसम्भवा होती है। इस एक-एक को तीन-त.न के चक्कर में न पड़कर मूल दस प्रकार गिना देना उचित होगा :--. . 'वक्त बोतव्यकाकूनां वाक्यवाच्यान्यसंन्निधेः ॥ प्रस्तावदेशकालादेर्वैशिष्ट्या प्रतिभाजुषाम् । योऽर्थस्यान्यार्थधी हेतुापारी व्यक्तिरेव सा॥' -~काव्यप्रकाश (३।२१,२२) अर्थात्-(१) वक्तृवैशिष्टय से अर्थात् वक्ता (काहने वाले) की विशेषता के कारण, (२) बोद्ध व्य अर्थात् जिससे बात कही जाय उसकी विशेषता के कारण, (३) काकु अर्थात् कण्ठध्वनि की विशेषता के कारण, (४) वाक्यवैशिष्टय अर्थात् जिस वाक्य में जो बात कही गई हो उसकी विशेषता के कारण, (५) वाच्यार्थ की विशेषता के कारण, (६) दूसरे व्यक्ति के सान्निध्य की विशेषता के कारण अर्थात् बात कही तो किसी से जाय लेकिन उसका व्यङ्गयार्थ किसी तीसरे के लिए हो, (७) प्रसङ्ग की विशेषता के कारण. (८) देश की विशेषता के कारण, (९) काल की विशेषता के कारण (भिखारीदासजी ने चेष्टा की विशेषता एक दसयां प्रकार भी गिनाया है)। जो दुसरा अर्थ