पृष्ठ:सिद्धांत और अध्ययन.djvu/२७९

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अभिध्यन्जनावाद एवं कलावाद-याक्षेपी का प्राधार २४७ successful, is not expression.' (Aesthetic-Aesthetic Feeling, Page 129)। सौन्दर्य को श्रेणियाँ नहीं होती, वह पूर्ण है; कुरूपता में दर्जे होते हैं (कोचे का यह मत कुछ विचारणीय है क्योंकि यह सौन्दर्य को निरपेक्ष बना देता है और संसार में निरपेक्ष वस्तुएँ थोड़ी ही होती हैं) । कुण्ठित और असफल अभिव्यक्ति (Embarressed activity the product of which is failure) ही कुरूपता है । क्रोचे के मत से कलाओं का वर्गीकरण व्यर्थ है । देवतायों में कोई बड़ा-छोटा नहीं होता। All the books dealing with classifications and systems of the arts could be burned without any loss whatever.' -Croce (Aesthetic-Technique and the Arts,Page 188) __ अर्थात् कला के विभाजन से सम्बन्ध रखनेवाली सारी पुस्तकें यदि जला दी जायँ तो कोई नुकसान न होगा। क्रोचे यह मानता है कि कलाकार स्वयंप्रकाशज्ञान प्राप्त करने में विवश है। इस प्रकार कला का काव्य के विषय के प्रति स्तुति या निन्दा का भाव ____ रखना असङ्गत है । अगर कलाकार के मन में बुरी आक्षेपों का अाधार छाप पड़ती है और यदि उसकी अभिव्यञ्जना ठीक होती है तो कलाकार का दोष नहीं है वरन् समाज का दोष है। इस अवस्था में आलोचक को चाहिए कि वह कलाकार को दोष न देकर समाज का सुधार करे कि जिससे कलाकार के मन पर वैसी छाप न पड़े :- ____ 'The critics should think tather of how they can effect changes in nature and in society, in order that . those impressions may not exist.'. -Croce (Aesthetic-Theoretic Activity, page 85) "क्लाइव बैल ( Clive Bell ) महोदय का निम्नोल्लिखित कथन भी कलावाद की पुष्टि करता है :-- "To appreciate a work of art we need bring with us nothing fron life, tho knowledge of its ideas and affairs, no fanniliarity with its emotions.' . -Clive Bell (Art). अर्थात् कला का रसास्वादन करने के लिए जीवन से कुछ भी अपने साथ