पृष्ठ:सिद्धांत और अध्ययन.djvu/२९५

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ शोधित नही है


समालोचना के मान--समालोचना के प्रकार (३) व्याख्यात्मक पालोचना, जिसमें कृति को महत्त्व देकर उसका सार और आन्तरिक रहस्य पाटक को अवगत कराया जाता है, (४) प्रभावात्मक पालोचना,जिसमें आलोचक अपने मन के प्रभावों को.बतलाता है। उसमें वह अपने को महत्त्व देता है। मनोवैज्ञानिक क्रम से प्रात्मप्रधान या प्रभावात्मक पालोचना पहले प्रायगी और सैद्धान्तिक पीछे किन्तु महत्त्व की दृष्टि से सैद्धान्तिक अालोचना पहले आयगी क्योंकि निर्णयात्मक आलोचना उसी पर निर्भर रहती है। हमारे यहाँ यद्यपि इस प्रकार का नामकरण नहीं मिलता तथापि सब प्रकार की आलोचनाएँ होती थीं। भावक शब्द ही व्याख्यात्मक आलोचना का द्योतक है । टीकाएँ भी व्याख्यात्मक आलोचना के रूप में ही . होती थीं। गण-दोष-विवेचन गण-दोषों के प्रकरण में रहता था। भामह, राजशेखर और मम्मट आदि के ग्रन्थ सैद्धान्तिक पालोचना के ही ग्रन्थ हैं। ____ राजशेखर द्वारा प्रतिपादित प्रकार :-राजशेखर ने चार प्रकार के भावक माने है-(१) अरोचकी, (२) सतृणाभ्यवहारी, (३) मत्सरी, (४) तत्त्वा- भिनिवेशी। अरोचकी वे होते है जिनको कोई काव्य रुचता नहीं। यह अरोचकता दो प्रकार की होती है-(क) नैगिकी और (ख) ज्ञानयोनिवाली। नैसर्गिको स्वभाव से ही होती है। ऐसे ही लोगों के लिये कहा गया है- 'अरसिकेषु कवित्तनिवेदनं शिरसि मा लिखि मा लिख' । ज्ञानजा या ज्ञानयोनि- वाली वह होती है जो एक ज्ञान में विशेषता प्राप्त कर लेने पर दूसरे ज्ञान के प्रति उदासीनता की जननी होती है। जैसे वैयाकरण को शृङ्गार का काव्य नहीं रुचता अथवा बहुत-से भक्त लोग कह देते हैं कि 'विहारी-सतसई' की सब प्रतियाँ समुद्र में डुबो देना चाहिए, ऐसे लोग पालोचक बनने की योग्यता नहीं रखते । सतृणाभ्यवहारी दूसरा छोर है, वे सर्वभक्षी होते हैं । उनको घास-फूस, कूड़ा-करकट सभी अच्छा लगता है। ऐसे लोग ही जो कुछ सामने आता है उसके लिए वाह-वाह कह उठते हैं, ये विवेकी नहीं होते। मत्सरी वे होते हैं जो गुण को भी दोष बतलाते हैं। अरोचकी भावक तो अपने स्वाभाविक दोष से एक विषय में अत्यधिक प्रवृत्ति होने के कारण दूसरे की कविता का प्रास्वादन नहीं कर सकते । मत्सरी लोग मिथ्याभिमान और ईया के कारण दूसरे के गुणों को भी दोष बतलाते हैं। तत्वाभिनिवेशी ही सच्चे मालोचक होते हैं । वे शब्दयोजना के गुण-अवगुण देखते हैं, दोषों का सुधार करते हैं और रस का प्रास्वाद करते हैं। ऐसे भावक भाग्य से.ही मिलते हैं। वास्तव में यह भावकों की मनोवृत्ति का विश्लेषण है और बहुत मूल्यवान् है। अब हम अालोचना के प्रकारों का एक-एक करके विवेचन करेंगे।