पृष्ठ:सिद्धांत और अध्ययन.djvu/३०३

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समालोचना के मान-कलावाद की व्याख्या और अन्य मत २६७ किसी अंश में श्रेणी-विभाजन भी हो जाता है । शुद्ध वैज्ञानिक भी जहाँ चने, गैहूँ, टमाटर या पालक में जाति-विभाग करता है वहाँ यह भी बतला देता है कि किसमें जीवन के पोषक तत्त्व अधिक है। यही मूल्य-सम्बन्धी आलोचना है जो बहुत अंश में हमको निर्णयात्मक मालोचना के निकट ले जाती है। इसमें श्रेणी-विभाजन श्राजाता है किन्तु परीक्षक-के-से नम्बर देना पालोचक का ध्येय न होना चाहिए। इसी के साथ नियमों को भी लचीला होना चाहिए । वास्तव में हमको नियमों और सिद्धान्तों में भेद करना चाहिए । नियम सिद्धान्तों के ही आधार पर बनते हैं। सिद्धान्त अधिक व्यापक होते हैं। नियम समय और स्थिति के अनुकूल बदलते रहते हैं किन्तु व्यापक सिद्धान्त वे ही रहते हैं। सब नियम मानव की सुविधा के लिए बने हैं। मनुष्य के लिए नियम हैं न कि मनुष्य नियमों के लिए । मनुष्य की सुविधा के आदर्श परिस्थितियों के साथ बदलते रहते हैं उनके अनुकूल नियमों में परिवर्तन लाने की आवश्यकता होती है । नियमों को अटल मानव-सुविधा के सिद्धान्त को भुला देना है। यदि नियम लचीले हों और साहित्य के विकास के साथ विकसित होते रहें तो निर्णयात्मक आलोचना में भी प्राचार्य और कलाकारों के आदर्शों में सामञ्जस्य बना रह सकता है। प्रभाववादी प्रात्मप्रधान पालोचना और निर्णयात्मक अालोचनाएँ भी एक-दूसरे की पूरक हैं। स्पिन्गर्न ने इन्हें पालोचना के दो लिङ्ग बतलाया है । प्रभाववादी आलोचना को उराने स्त्रीलिङ्गी बालोचना कहा है और निर्णयात्मक आलोचना को पुल्लिङ्गी पालोचना कहा है । अन्य प्रकार-मूल्य-सम्बन्धी आलोचना के विवेचन से पूर्व हम व्याख्यात्मक पालोचना की सहायिका रूप से उपस्थित होने वाली आलोचना- पद्धतियों का उल्लेख कर देना चाहते हैं। वे हैं ऐतिहासिक ( Historical ) लालोचना, मनोवैज्ञानिक ( Psychological ) अालोचना और तुलनात्मक (Comparative) आलोचना । ऐतिहासिक आलोचना का सूत्रपात फांसीसी नालोचक टेन ( Hippolyte Taine ) से हुआ उसने बतलाया कि कवि या लेखक अपनी जाति (Race), परिस्थितिमील्यू (Milieu) और काल ( Moment ) की उपज होता है। जाति से उसका अभिप्राय जाति की परम्परागत मनोवृत्ति और स्वभाव से है (जिस प्रकार व्यक्ति का स्वभाव होता है उसी प्रकार जाति का भी स्वभाव होता है जैसे, भारतीय धर्मभीरु होते हैं, श्राइरिश आलसी होते है, स्कीटलेण्ड निवासी कंजूस होते हैं, अमरीकावाले व्यवसायी होते हैं इत्यादि), परिस्थिति से अभिप्राय वातावरण की सम्पूर्णता