पृष्ठ:सिद्धांत और अध्ययन.djvu/३०४

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२६८ सिद्धान्त और अध्ययन से है जिसमें कि वहाँ का जलवायु, राजनीतिक संस्था, सामाजिक परिस्थितियां श्रादि शामिल हैं और काल से उसका मतलब उस समय के हार्द (Spirit ) और जातीय विकारा की दशा रो है । हडसन ने अपने 'Introduction to the sturly ol literatures' (Page 9) में इन प्रभावों की व्याख्या इरा प्रकार की है : ...... ...... I am to a certain extent following the lead of Taine who attenmpted to interpret: literaturc: in rigorously scientific wity by the application of his famous formula of the race, the milieu, and the mo- ment ; meaning by rauce, the hearilitary temperiment kund disposition of people, lyy imilicu, the tottality ol their surroundings, their climult, play:icial environment, political institutions, social conditions and the likes; und by moment the spirit of the period, an ol thint parti- cular stage of national development which Thts RIT reached at uny given time.' ___इन प्रभावों को बाबू श्यामसुन्दरदाराजी ने भी अपने साहित्यालोचन पृष्ठ ५३ पर उल्लेख किया है किन्तु वहाँ Tajne ना नाम नहीं पाया है। लेखक या कवि अपने समय की राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों से तो प्रभावित होता है और जातीय मनोवृत्तियों को भी पैतृक सम्पत्ति के रूप में ग्रहण करता है किन्तु वह स्वयं भी कुछ विशेषता रखता है। यह मनोवैज्ञानिक आलोचना का विषय बन जाता है। इस प्रकार ऐतिहासिक आलोचना जहाँ बाहरी परिस्थियों का विवेचन करती है वहाँ मनोवैज्ञानिक आलोचना आन्तरिक प्रेरका शक्तियों का उद्घाटन करती है। प्राचार्य श्यामसुन्दर दासजी तथा प्राचार्य शुक्लजी के इतिहारा इरा सम्बन्ध में विशेष रूप से उल्लेखनीय है। कवि और लेखक पर बहुत-गुछ समय और परिस्थिति की छाग रहती है (इस बात पर टेन से पूर्व Sainte-Buve ने भी बल दिया था गिन्तु इतने स्पष्ट रूप से नहीं जितना कि टेग ), वह अपने समय की उपज होता है किन्तु वह समय की गति-विधि में भी योग देता है। कवि यदि पावल अपने समय की ही उपज हो तो विचार-धारा श्रागे ही न बढ़े। हम पनि के अध्ययन में उस पर के बाहरी प्रभावों के साथ यह भी देखना चाहिए कि उसने समाज