पृष्ठ:सिद्धांत और अध्ययन.djvu/५९

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काव्य की परिभाषा-काव्य के तत्त्व -Quoted by shipley in quest for Literature (P. 241.). कारलायल : कारलायल (Carlyle) ने काव्य की सङ्गीतमयता पर बल दिया है । कविता मनोवेगमय और सङ्गीतमय भाषा में मानव-अन्तःकरण की मूर्त और कलात्मक व्यञ्जना करती है। कारलायल ने कविता को सङ्गीत- मय विचार कहा है-'Poetry we will call musical thought'- और सङ्गीतमय विचार (musical thought) की व्याख्या करते हुए बतलाया है कि सङ्गीतमय विचार उस मन का होता है जो वस्तुओं के अंन्तस्तल में प्रवेश करके उनका रहस्य जान चुका है। उन्होंने सङ्गीत को अलङ्कारिक रूप से ही नहीं माना वरन् उन्होंने छन्द (Metre) और गीत (Song) को भी महत्ता दी है :--- ___ 'A musical thought is one spoken by a mind that has penetrated into the inmost heart of the thing, detected the inmost mystery of it.' -FHero and hero worship (Hero as poet). मेथ्यू पार्नल्ड : मेथ्यू · मानल्ड (Matthew Arnold) ने कविता को मूल में जीवन की आलोचना कहा है-'Poetry is at bottom a criticism of life' ( The study of poetry in 'Essays in criticism', Second series ) । उन्होंने जीवन और विचारात्मक पक्ष अर्थात् बुद्धितत्त्व पर अधिक बल दिया है। इस परिभाषा में भावात्मकता का कुछ अभाव-सा दिखाई देता है । जॉनसन : आचार्य जॉनसन ( Johnson ) ने अपनी परिभाषा में प्रायः चारों तत्त्वों को सम्मिलित कर लिया है । उनका कथन है कि कविता सत्य और प्रसन्नता के सम्मिश्रण की कला है जिसमें बुद्धि की सहायता के लिए कल्पना का प्रयोग किया जाता है । कला शब्द में अभिव्यक्ति भी पाजाती है:---- _ 'Poetry is the art of uniting pleasure with truth by calling imagination to the help of reason.' -Life of milton. हडसन : हडसन (Hudson) इन सब दृष्टियों का समन्वय-सा करता है। उसका कथन है कि कविता कल्पना और मनोवेगों द्वारा जीवन की व्याख्या करती है :- . 'Poetry is interpretation of life through imagination