पृष्ठ:सिद्धांत और अध्ययन.djvu/६३

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काव्य की परिभाषा-समन्वय इस परिभाषा में सत्य और सौन्दर्य के समन्वय में आत्मा की सहजवृत्ति ( Intuition ) पर बल दिया गया है। यह परिभाषा जॉनसन की परि- भाषा के, जिसमें सत्य और प्रसन्नता की बात कही गई है, निकट है । इसमें यह विशेषता है कि चारुता या सौन्दर्य को सत्य के मूल में कहा गया है । इसमें दो पृथक् वस्तुओं के समन्वय की बात नहीं है वरन् दोनों को एक-दूसरे का भीतरी और बाहरी रूप कहा गया है। इसमें कवि की ही प्रधानता है, पाठक और अभिव्यक्ति को गौरण रक्खा गया है। ____ काव्य की पूर्णता के लिए पाटक भी उतना ही आवश्यक है जितना कि कवि । नाटक की पूर्णता उसके दर्शकों में है—'जङ्गल में मोर नाचा किसने जाना', 'वह तमाशा नहीं जिसका कोई तमाशाई नहीं' । कवि समस्यय रस के बीज को अपनी कल्पना के रस में सिद्ध करके अपने हृदय में अंकुरित करता है । वह अंकुर भाषा के साधनों-अभिधा, लक्षणा, व्यञ्जना, अलङ्कारादि-द्वारा कृति में पल्लवित और पुष्पित होकर सहृदय पाठक के संस्कारों की उष्णता में फलवान होता है । जिस प्रकार शब्द की सार्थकता वायु के कम्पनों में नहीं है वरन् कहने और सुनने वाले के साम्य में है, उसी प्रकार काव्य की सार्थकता कवि और पाठक के भावसाम्य में है । उसी भावसाम्य में अर्थ का पूर्णातिपूर्ण विकास दिखाई पड़ता है। जिस प्रकार कवि में संसार में फैली हुई सूक्ष्म भावनाओं की ग्राह- कता एवं विस्तारक शक्ति रहती है, वैसे ही सहृदय पाठक में भी कवि के हृदय की सूक्ष्म तरङ्गों को मूर्त्तता प्रदान करने की शक्ति रहती है और यदि वह भावक या आलोचक भी हुआ तो उसमें विस्तारक शक्ति भी रहती है। कवि, पाठक तथा काव्य के विषय तीनों ही देश-काल के बन्धन से मुक्त होकर पार- स्परिक साम्य के विधायक होते हैं। इन सब बातों को एक परिभाषा के संकु- चित घेरे में बाँधना कठिन है फिर भी नीचे के शब्दों में यह समन्वित भावना रक्खी जा सकती है। ____ काव्य संसार के प्रति कवि की भाव-प्रधान (किन्तु क्षुद्र वैयक्तिक सम्बन्धों से युक्त) मानसिक प्रतिक्रियाओं की, कल्पना के ढाँचे में ढली हुई, श्रेय की प्रेयरूपा प्रभावोत्पादक अभिव्यक्ति है। प्रभावोत्पादक शब्द द्वारा भाषा की शक्तियों और अलङ्कारादि के साथ पाठक का भी संकेत हो जाता है। इस परिभाषा में प्रायः सभी बातें पागई है किन्तु उसमें वह लाधव नहीं जो 'वाक्यं रसात्मक काव्यं में है । वास्तव में यह उसी का वृहद् संस्करण है ।