पृष्ठ:सिद्धांत और अध्ययन.djvu/६४

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सिद्धान्त और अध्ययन साहित्य शब्द अपने व्यापक अर्थ' में सारे वाङमय का घोलक है। धाणी का जितना प्रसार है वह सब साहित्य के अन्तर्गत है । इस पार्थ में श्रौषधियों के विज्ञापन और बीमा-नाम्पनियों के सूचना-पन भी. काव्य और साहित्य साहित्य में आजाते हैं । वैज्ञानिक साहित्य, गणित- शास्त्र अथवा अर्थ-शास्त्र-सम्बन्धित साहित्य ऐरी प्रयोग तो हमारी भाषा में प्रचलित है हो । साहित्य का शब्दार्थ भी संग्रह को ही निकट है। अपने संकुचित अर्थ में साहित्य काव्य का पर्याय हो जाता है। जहाँ हम साहित्य का प्रश्न-पत्र कहते हैं वहाँ साहित्य से काव्य ही अभिप्रेत होता है । यही हाल अंग्रेजी शब्द 'Literature' का है। व्यापक अर्थ में जितना अक्षरों (Letters) का आयोजन है वह सब लिट्रेचर है। लिट्रेचर शब्द लैटरां से ही बना है । संकुचित अर्थ में लिट्रेचर काव्य का पर्याय है । काव्य में गा और पद्य दोनों ही आते हैं। कविता शब्द यद्यपि पद्यात्मक काव्य में रूढ़ हो गया है तथापि कभी-कभी उसका व्यापक अर्थ में भी प्रयोग होने लगता है, जैसे जन कोई मनुष्य अधिक भावुवातापूर्ण वार्तालाप करने लगता है तब हम उससे नाहते हैं-'भाई तुम तो कविता करने लगे' । पाविता रो पद्यात्मक साहित्य का बोध होता है किन्तु काव्य शब्द पूरे भावप्रधान गद्य-पद्यात्मना साहित्य का बोधक होता है। हमको यह ध्यान रखना चाहिए कि यद्यपि पध में गा की अपेक्षा श्रुति-माधुर्य अधिक होता है और इस कारण उसमें प्रभावोत्पादकता भी श्राजाती हैं तथापि पद्यबद्ध-मात्र होने से कोई रचना कविता या काव्य नहीं बन जाती है। पद्य को अंग्रजी में verse कहते है, Poetry या कविता नहीं। पद्य कविता का आकार-मात्र कहा जा सकता है उसकी आत्मा तो ररा में ही है। - साहित्य के व्यापक अर्थ में काव्य और शास्त्र दोनों ही पाजाते हैं। रस- प्रधान साहित्य काव्य कहलाता है और ज्ञान-प्रधान साहित्य, जिसमें बुद्धि और नियम का शासन अधिक रहता है, शास्त्र ( Science ) कहलाता है। जीवन की पूर्णता दोनों के अनुशीलन में है.--'काव्य-शास्न विनोदेन कालो गच्छति धीमताम्। १ इसका यौगिक अर्थ इस प्रकार है-'सहितयोः भावः (शब्दार्थयोः)' अर्थात् शब्द और अर्थ के सहित होने का भाव । धे तो स्वभाव से भी मिले हुए हैं-'वागर्थाविव सम्पृक्तौ' । सहित के दोनों ही अर्थ होते हैं-साथ और 'हितेन सह सहित' अर्थात् हित के साथ । हित के साथ होने के भाव को भी साहित्य कहते हैं, दोनों ही अर्थ व्यापक हैं।