पृष्ठ:सिद्धांत और अध्ययन.djvu/७३

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काव्य और कला-कलापों का वर्गीकरण ३५ वर्गीकरण नहीं हुआ है । कामसूत्रों में ६४ कलानों का उल्लेख है। उनमें कुछ उपयोगी कलाएँ भी है, जैसे सोना, पीतल ढालना आदि किन्तु अधिकांश कलाओं का सम्बन्ध विलास-वैभव की सामग्री से है। कला की भारतीय परम्परा में वे ही वस्तुएँ पाती हैं जिनका जानना उस समय के विदग्ध पुरुष अथवा स्त्री के लिए आवश्यक था। माला गूथना, रनों की परीक्षा, सोना-चाँदी ढालना, चार- पाई बुनना आदि की कलानों का भी सम्बन्ध विलास-वैभव से ही है । पाश्चात्य देशों में जो मुख्य ललित कलाएँ मानी गई हैं वे सब चौंसठ कलाओं में प्राजाती । पाश्चात्य मत से मुख्य ललित कलाएँ पाँच हैं--(१) वास्तुकला ( भवन- निर्माणकला ), (२) मूत्ति-तक्षणकला, (३) आलेख्य (चित्रकला), (४) सङ्गीत, (५) काव्य । इनमें काव्य को छोड़कर सभी कलाएँ ६४ कलाओं में शामिल हैं। काव्य से सम्बन्धित काव्य के अङ्गस्वरूप अन्य कलाएँ भी जिनका काव्य के मनो- रञ्जन-पक्ष से अधिक सम्बन्ध है, इनमें आगई हैं। इन पाँचों कलाओं के श्रेणी- बद्ध करने का यह प्राधार रखा गया है कि जिस कला में सामग्री का अपेक्षाकृत कम प्रयोग हो और भाव की अधिक व्यञ्जना हो, वही कला श्रेष्ठ है। इन कलाओं में पहली तीन का सम्बन्ध देश (Space) से है और पिछली दो का सम्बन्ध काल से है । सङ्गीत की ताल-लय काल से ही सम्बन्ध रखती हैं। कविता की मात्राएँ भी काल पर आश्रित हैं। इसीलिए पहली तीन कलाओं को पार्श्व-स्थापन (Juxtaposition) की कला कहते हैं और पिछली दो को पूर्वापर क्रम (Succession) की कला कहते हैं। पहली तीन का सम्बन्ध नेत्र से है और शेष दोनों का सम्बन्ध प्रधानतया कर्ण से है। पहली तीन कलाओं में मूर्त्तत्त्व अधिक है, पिछली दो अमूर्तप्रायः है । यदि इस विभाजन को इन्द्रियों पर आश्रित करते हैं और काव्य का सम्बन्ध केवल कानों से करते हैं तो दृश्यकाव्य का काव्य के क्षेत्र से बहिष्कार कर देना होगा या विभाजन का आधार बदलना पड़ेगा। वैसे लिखे या छपे अक्षरों द्वारा काव्य का सम्बन्ध भी दोनों इन्द्रियों से हो जाता है। सङ्गीत : इसको कामसूत्रों में सबसे पहला स्थान दिया गया है। प्लेटो ने भी सङ्गीत के ही अन्तर्गत काव्य को रक्खा है। उसके शिक्षा के कार्यक्रम में सङ्गीत मन के लिए और जिमनास्टिक शरीर के लिए बताया गया है..... 'Music for The mind, gymnastics for the body. --इसमें देश का स्थान काल ले लेता है। यह कला मतिशील है। गीत, ताल, लय-ये सब गति के ही रूप है और कालाश्रित है। इससे नृत्य, वाद्य भी सम्बन्धित .: